National High Speed Rail Corporation Limited ने 12 अक्टूबर 2026 को वडोदरा में दिल्ली-मुंबई राजधानी मुख्य लाइन के ऊपर सभी 14 पोर्टल बीम का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है। यह उपलब्धि 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के काम में एक बड़ा कदम है।
इन कंक्रीट संरचनाओं की मदद से अब प्रोजेक्ट के अगले चरण का काम शुरू हो सकेगा। ये बीम ऊंचे वियाडक्ट को सहारा देंगे, जिससे नीचे की मौजूदा रेल पटरियों पर ट्रेनों का परिचालन बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा।
इस जगह पर तकनीकी बाधाओं के कारण इंजीनियरों के लिए पुराने तरीके से प्रीकास्ट लॉन्चिंग करना संभव नहीं था। इसलिए National High Speed Rail Corporation Limited के अधिकारियों ने पटरियों के ऊपर सीमित जगह को देखते हुए कास्ट इन सीटु निर्माण विधि को चुना।
पोर्टल बीम की तकनीकी खासियत और निर्माण
प्रोजेक्ट में लगाए गए इन सभी 14 पोर्टल बीम का वजन लगभग 1,500 टन है। आकार की बात करें तो हर एक बीम की लंबाई 37 मीटर, चौड़ाई 4 मीटर और ऊंचाई 4 मीटर है।
एक सिंगल बीम को तैयार करने के लिए लगभग 590 क्यूबिक मीटर कंक्रीट और 55 टन रीइन्फोर्समेंट स्टील के पिंजरे का इस्तेमाल किया गया है। निर्माण टीमों ने इन इंस्टॉलेशन को शहरी क्षेत्र के दो अलग-अलग हिस्सों में बांटा हुआ है।
प्रोजेक्ट के रिकॉर्ड के अनुसार इन बीम्स का वितरण इस प्रकार है:
- 10 बीम वडोदरा बुलेट ट्रेन स्टेशन और विश्वमित्री रेलवे स्टेशन के बीच लगाए गए हैं।
- बाकी 4 बीम वडोदरा रेलवे स्टेशन और छायापुरी रेलवे स्टेशन के बीच के क्षेत्र को जोड़ते हैं।
कार्यान्वयन एजेंसी ने बताया कि भारतीय रेलवे के ऑपरेशंस के साथ इस काम को जोड़ने के लिए सटीक सर्वे और लगातार निगरानी करना बहुत जरूरी था।
इंजीनियरिंग उपलब्धियां और प्रोजेक्ट की प्रगति
पूरी असेंबली प्रक्रिया के दौरान इंजीनियरों की मदद के लिए हाई कैपेसिटी क्रेन और लॉन्ग बूम कंक्रीट पंप का उपयोग किया गया। National High Speed Rail Corporation Limited के मुताबिक, इस काम के पूरा होने से राजधानी लाइन के ऊपर 40 मीटर लंबे कंपोजिट गर्डर्स को लॉन्च करने की मुख्य संरचनात्मक जरूरत पूरी हो गई है।
इतने जटिल क्रॉसिंग को सफलतापूर्वक पार करना यह दिखाता है कि मौजूदा परिवहन मार्गों को लंबे समय तक बंद किए बिना बड़े पैमाने पर हाई स्पीड इंफ्रास्ट्रक्चर का काम आगे बढ़ाया जा सकता है। The Indian Express और Financial Express जैसे आउटलेट्स ने भी इस बारीक तालमेल की जरूरत पर जोर दिया है।
कुल कॉरिडोर के भौतिक कार्य की प्रगति अलग-अलग हिस्सों के हिसाब से 60 से 80 प्रतिशत के बीच है। इस प्रोजेक्ट के लिए वित्तीय निवेश काफी बड़ा है और अनुमानित लागत 1.98 से 2 लाख करोड़ रुपये के बीच बताई गई है। इसमें Japan International Cooperation Agency एक प्रमुख तकनीकी और वित्तीय भागीदार बना हुआ है।
भविष्य की समयसीमा और संभावित लाभ
रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने संकेत दिया है कि सूरत और बिलीमोरा के पास वाला पहला परिचालन खंड 2027 में शुरू होना चाहिए। पूरे कॉरिडोर को चरणों में खोलते हुए 2029 तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।
जब यह सेवा शुरू होगी, तो यात्रियों को यात्रा के समय में बड़ी कमी मिलेगी। उम्मीद है कि लिमिटेड स्टॉप सेवाओं के जरिए इस पूरे रूट को लगभग 2 घंटे में तय किया जा सकेगा। इसके अलावा, निर्माण के दौरान रोजगार मिलने और बेहतर लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी से गुजरात और महाराष्ट्र की क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को फायदा होगा।
हालांकि, कुछ आलोचक इस प्रोजेक्ट की ऊंची वित्तीय लागत और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर का जिक्र करते रहते हैं, लेकिन ये बहस हालिया इंजीनियरिंग सफलता से अलग विषय है।
अगले चरण की तैयारी करते हुए NHSRCL के अधिकारी अब वियाडक्ट को आगे बढ़ाने के लिए स्पैन बाय स्पैन तरीके से 40 मीटर लंबे कंपोजिट गर्डर्स को लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं। एलाइनमेंट के अन्य हिस्सों पर सुरंगों, स्टेशनों और ट्रैक बिछाने का काम भी एक साथ चल रहा है।
इस खास हिस्से को पूरा करने के लिए स्टाफ सदस्यों को भारतीय रेलवे के साथ उन ऑपरेशनल ब्लॉक्स के लिए समन्वय करना होगा जिनकी अभी भी जरूरत है। आगे का रास्ता अब सिविल संरचनाओं के साथ सिग्नलिंग और सिस्टम को जोड़ने का है ताकि इसे व्यावसायिक उपयोग के लिए तैयार किया जा सके।









