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नासिक के औद्योगिक क्षेत्र के भूजल में मिला जहरीला क्रोमियम, सुरक्षित सीमा से 1,000 गुना ज्यादा

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Naradsamvad - Narad news Agency
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नासिक के औद्योगिक क्षेत्र के भूजल में हेक्सावलेंट क्रोमियम की मात्रा खतरनाक स्तर पर पाई गई है। प्रयोगशाला जांच में यह सामने आया है कि पानी में इस जहरीले तत्व की सघनता सुरक्षित पीने की सीमा से 1,000 गुना से भी अधिक है।

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यह गंभीर खोज सिमास्थ कुंभ मेले से कुछ हफ्ते पहले हुई है, जिसने स्थानीय निवासियों और आने वाले श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है। जांच के लिए नमूने अंबाड औद्योगिक इलाके से लिए गए थे, जिसका प्रबंधन महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) द्वारा किया जाता है।

साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल (SANDRP) द्वारा 8 अक्टूबर 2026 को जारी एक प्रेस नोट के अनुसार, पानी में हेक्सावलेंट क्रोमियम की मात्रा 50.3 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है। यह मात्रा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स द्वारा निर्धारित 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर की सीमा से बहुत ज्यादा है।

स्थानीय निवासियों की सेहत पर बुरा असर

SANDRP की परिणीता दांडेकर ने खुद नमूने इकट्ठे किए थे। उन्होंने ऐसा तब किया जब स्थानीय लोगों ने शिकायत की कि उनके बोरवेल का पानी गहरा पीला दिखाई दे रहा है। इससे पहले कार्यकर्ता रोशन केदार और राजेश पंडित ने इस इलाके में लोगों को त्वचा संबंधी बीमारियों से जूझते हुए पाया था।

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हेक्सावलेंट क्रोमियम स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक है क्योंकि इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने इसे ग्रुप 1 मानव कार्सिनोजेन (कैंसर पैदा करने वाला तत्व) माना है। स्थानीय लोग नहाने और धोने जैसे रोजमर्रा के कामों के लिए इस पानी का उपयोग कर रहे हैं, जिसके कारण उन्हें त्वचा पर छाले, रैशेज और गहरे घाव हो रहे हैं।

त्वचा के अलावा यह शरीर के आंतरिक अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से लिवर खराब होने, किडनी फेल होने और सांस संबंधी बीमारियां होने का खतरा रहता है। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, स्क्रीनिंग सर्वे में अब तक 19 ऐसे लोग मिले हैं जो त्वचा की बीमारियों से पीड़ित हैं।

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प्रभावित इलाके में करीब 20,000 से 25,000 लोग रहते हैं जो निजी बोरवेल पर निर्भर हैं। इन परिवारों का कहना है कि नासिक म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की पानी की सप्लाई भरोसेमंद नहीं है, इसलिए वे मजबूरी में इस प्रदूषित भूजल का इस्तेमाल करते हैं। अब इन परिवारों पर इलाज के भारी खर्चे का बोझ बढ़ रहा है।

कुंभ मेले पर खतरा और सरकारी कार्रवाई

प्रदूषण का यह खतरा अब गोदावरी नदी तक फैल सकता है क्योंकि स्थानीय नालों के जरिए यह पानी नदी में जा रहा है। कुंभ मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। इस बड़े आयोजन की तैयारियां चल रही हैं और 31 अक्टूबर को ध्वजारोहण समारोह होना तय है।

अगर क्रोमियम का यह जहरीला बहाव नदी में मिला, तो यह एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन जाएगा। मीडिया कवरेज और SANDRP के आंकड़ों के बाद सरकारी अधिकारियों ने अपनी कार्रवाई तेज की है। जिला कलेक्टर आयुष प्रसाद ने शहर के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इन निष्कर्षों की जानकारी दी।

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प्रशासन ने अब तक अंबाड MIDC जोन की कम से कम 15 औद्योगिक इकाइयों को बंद करने का नोटिस जारी किया है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य एजेंसियों की संयुक्त निरीक्षण टीमें अब इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।

इन कदमों के बावजूद SANDRP का कहना है कि शुरुआती नियामक प्रतिक्रिया नाकाफी थी। प्रभावित लोगों की मांगें निम्नलिखित हैं:

  • प्रदूषित बोरवेल को तुरंत बंद किया जाए।
  • रोजाना सुरक्षित टैंकर पानी की आपूर्ति की जाए।
  • रसायन के संपर्क में आए लोगों के लिए मुफ्त मेडिकल कैंप लगाए जाएं।

कुंभ मेले की तारीखें नजदीक आ रही हैं, इसलिए अधिकारियों पर नदी और आसपास के जल स्तर की व्यापक जांच करने का दबाव है। इस क्षेत्र की दीर्घकालिक सुरक्षा इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार इस औद्योगिक प्रदूषण संकट को कितनी प्रभावी ढंग से संभालती है।

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