दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर 2026 को एक स्टैंडिंग ऑर्डर जारी किया है। इस आदेश के जरिए उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से जंतर मंतर को हटा दिया है।
यह प्रशासनिक कदम 28 अप्रैल 2022 को जारी किए गए पिछले स्टैंडिंग ऑर्डर में बदलाव करता है। अब भविष्य में होने वाले प्रदर्शनों के लिए शहर में तीन नए मैदानों के नाम तय किए गए हैं।
जंतर मंतर रोड का हिस्सा पिछले तीस से अधिक वर्षों से सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों के मुख्य केंद्र के रूप में काम कर रहा था। 1990 के दशक में जब इंडिया गेट और बोट क्लब क्षेत्र के पास सभाओं पर प्रतिबंध लगाया गया, तब से यह विरोध स्थल के रूप में उभरा था।
विरोध प्रदर्शनों के लिए तय किए गए नए स्थान
अधिकारियों ने मध्य दिल्ली के स्थान की जगह लेने के लिए तीन विशिष्ट क्षेत्रों की पहचान की है। इनमें मध्य दिल्ली स्थित रामलीला मैदान, उत्तर दिल्ली का बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के शाहदरा क्षेत्र में स्थित सीबीडी ग्राउंड शामिल हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन एक समिति की सिफारिशों के बाद इन तीनों स्थलों को जंतर मंतर के विकल्प के रूप में चुना गया है। प्रदर्शनों को लुटियंस जोन से दूर ले जाने का मकसद भीड़भाड़ और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर तरीके से संभालना है।
हालांकि, आलोचकों का मानना है कि संसद और प्रमुख सरकारी मंत्रालयों से दूरी होने के कारण जनता की शिकायतों की दृश्यता कम हो सकती है। प्रदर्शनकारियों और नागरिक समाज समूहों के बीच अब अनिश्चितता है क्योंकि वे इन मैदानों के उपयोग के नियमों को तय करने वाले संशोधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का इंतजार कर रहे हैं।
राजनीतिक तनाव और प्रदर्शनों का प्रभाव
यह प्रशासनिक बदलाव ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक तनाव काफी ज्यादा है। कॉकरोच जनता पार्टी और इंडिया गठबंधन सहित विभिन्न समूह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की मांग कर रहे हैं।
इन समूहों की चिंताएं मुख्य रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन के दौरान हुई कथित अनियमितताओं पर केंद्रित हैं। लाइव लॉ, फर्स्टपोस्ट, बिजनेस स्टैंडर्ड और द स्टेट्समैन की रिपोर्ट बताती हैं कि यह आदेश केवल स्थलों को बदलता है, लेकिन सामान्य कानून के तहत शांतिपूर्ण सभाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाता है।
राजनीतिक दलों और स्वतंत्र प्रदर्शनकारियों को अब नई व्यवस्था के साथ तालमेल बिठाना होगा। नए स्थानों पर अनुमति लेने के लिए सुरक्षा और सुविधाओं के अलग-अलग इंतजाम करने होंगे।
सुविधाएं और पुलिस की भविष्य की रणनीति
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नए मैदानों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 के आसपास अपनी टिप्पणी में कहा था कि वैकल्पिक स्थलों पर प्रदर्शनकारियों के लिए उचित सुविधाएं होनी चाहिए।
अभी भी यह सवाल बना हुआ है कि पुलिस उन स्वतःस्फूर्त प्रदर्शनों को कैसे संभालेगी जो इन निर्धारित मैदानों का पालन नहीं करते हैं। आने वाले स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर में प्रतिभागियों की संख्या, साउंड उपकरणों के उपयोग और रुकने की अवधि जैसे विवरण स्पष्ट होने की उम्मीद है।
अधिकारियों ने अभी तक उस समिति की रिपोर्ट का पूरा टेक्स्ट जारी नहीं किया है जिसने इन बदलावों की सिफारिश की थी। प्रदर्शनकारी चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी अपनी मांगों के लिए न्यायिक या विधायी हस्तक्षेप की तलाश जारी रख सकते हैं।
मध्य दिल्ली में सुरक्षा कड़ी बनी हुई है क्योंकि विभिन्न समूह शहर में आयोजन करना जारी रखे हुए हैं। दिल्ली पुलिस अपनी मौजूदा शक्तियों के तहत सभी सार्वजनिक सभाओं का नियमन करती रहेगी। कमिश्नर द्वारा अनिवार्य की गई यह नई प्रक्रिया भविष्य के प्रदर्शनों के लिए एक परीक्षा की तरह होगी। अब जो कोई भी विरोध प्रदर्शन करना चाहता है, उसे विभाग द्वारा निर्धारित अपडेटेड आवश्यकताओं के साथ समन्वय करना होगा।

























