भारत में सितंबर 2026 के दौरान रिटेल महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई है। अगस्त के महीने में यह आंकड़ा 4.83 प्रतिशत दर्ज किया गया था, जिसमें अब बढ़ोतरी देखी गई है। महंगाई में इस उछाल का मुख्य कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों में आई तेज वृद्धि है।
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि 7.74 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिसमें सबसे बड़ा असर प्याज की बढ़ती कीमतों का रहा है। Ministry of Statistics and Programme Implementation ने 12 अक्टूबर को ये प्रोविजनल आंकड़े जारी किए हैं।
यह स्तर नए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स सीरीज का सबसे उच्चतम बिंदु है, जिसमें 2024 को बेस ईयर माना गया है। मार्च के बाद से लगातार छठे महीने महंगाई दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
ग्रामीण और शहरी इलाकों में महंगाई का असर
महंगाई की इस मार का बोझ शहरी केंद्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों पर ज्यादा पड़ा है। ग्रामीण इलाकों के लिए हेडलाइन इन्फ्लेशन 6.08 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि शहरी बाजारों में यह दर 4.88 प्रतिशत रही।
Ministry of Statistics and Programme Implementation अपनी रिपोर्टिंग के मानकों को बनाए रखने के लिए डेटा जुटाता है। इसके लिए विभाग ने 1,407 शहरी बाजारों और 1,465 गांवों से यह जानकारी इकट्ठा की है।
किचन के बजट पर खाद्य कीमतों की मार
कुल इंडेक्स में भोजन और पेय पदार्थों की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है। सरकारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, प्याज की कीमतों में साल-दर-साल 108.09 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है, जो अगस्त में 48.78 प्रतिशत थी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अन्य चीजों की कीमतों में भी उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी देखी गई है, जो इस प्रकार है:
- सिल्वर ज्वेलरी की कीमतें 87.80 प्रतिशत बढ़ गईं।
- अदरक के दामों में 62.85 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
- लहसुन की लागत 54.62 प्रतिशत तक बढ़ गई।
- नींबू की कीमतों में 36.41 प्रतिशत का उछाल आया।
हालांकि सभी वस्तुओं की कीमतें नहीं बढ़ीं और कुछ चीजों में गिरावट यानी डिफ्लेशन देखा गया। आलू की कीमतों में 11.50 प्रतिशत और टमाटर की लागत में 8.62 प्रतिशत की कमी आई है। इसके अलावा मोटर कारों और जीप की कीमतों में 4.51 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
Ministry of Statistics and Programme Implementation के रिकॉर्ड के अनुसार सितंबर के आंकड़े प्रोविजनल हैं, जबकि अगस्त के आंकड़े फाइनल माने जाएंगे।
राज्यों की स्थिति और विशेषज्ञों की राय
क्षेत्रीय आंकड़ों को देखें तो अलग-अलग राज्यों में महंगाई का दबाव अलग रहा है। तमिलनाडु में महंगाई दर 6.81 प्रतिशत रही, जबकि ओडिशा में यह 6.70 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 6.68 प्रतिशत दर्ज की गई।
तेलंगाना में यह दर 6.64 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 6.29 प्रतिशत रही। वहीं दिल्ली में महंगाई दर काफी कम 3.40 प्रतिशत पर बनी रही।
Bank of Baroda के इकोनॉमिस्ट मदन सबनविस का कहना है कि यह आंकड़ा कुछ शुरुआती अनुमानों से कम रहा है। उनके अनुसार, नए सीजन के आने से पहले पुराने स्टॉक के खत्म होने की वजह से यह दबाव बढ़ा है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में महंगाई कम होगी या नहीं, यह सब्जियों की फसल की आवक पर निर्भर करेगा। Reserve Bank of India इन घटनाक्रमों पर नजर रख रहा है क्योंकि उसका लक्ष्य 2 से 6 प्रतिशत के टॉलरेंस बैंड के भीतर 4 प्रतिशत महंगाई दर रखना है।
खाद्य लागत में यह वृद्धि केंद्रीय बैंक के लिए रास्ता मुश्किल करती है और ब्याज दरों पर चल रही चर्चाओं को प्रभावित करती है। देश भर के परिवारों, खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वालों की मासिक कमाई पर दबाव बढ़ा है क्योंकि उनका खर्च भोजन पर ज्यादा होता है।
मंत्रालय द्वारा अक्टूबर महीने के आंकड़े 12 नवंबर, 2026 को जारी किए जाएंगे। मार्केट पार्टिसिपेंट्स और पॉलिसी मेकर्स अब कोर इन्फ्लेशन और जरूरी सब्जियों की सप्लाई की स्थिति पर नजर रखेंगे। यह जानकारी Ministry of Statistics and Programme Implementation के पोर्टल और Reuters की रिपोर्ट्स के जरिए उपलब्ध है। फार्मास्युटिकल ट्रेड मार्जिन को लेकर कानूनी चर्चाएं जारी हैं, लेकिन वर्तमान में परिवारों के लिए भोजन की लागत ही सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।









