भारतीय किसान मजदूर यूनियन दशाहरी संगठन के राज्य सचिव और बाराबंकी जिला अध्यक्ष निहाल अहमद सिद्दीकी ने भारत के राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने दिल्ली के जंतर मंतर पर युवाओं, महिलाओं, पत्रकारों और वकीलों पर हुए हालिया लाठीचार्ज का कड़ा विरोध किया है।
निहाल अहमद सिद्दीकी ने इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक आवाजों को बल प्रयोग के बजाय न्याय के जरिए सुना जाना चाहिए।
सिद्दीकी ने इस बात पर जोर दिया कि संविधान की रक्षा और बुनियादी नागरिक अधिकारों का संरक्षण सबसे ऊपर है। उन्होंने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील करते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों की बात कही।
जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई
जंतर मंतर पर यह विरोध प्रदर्शन 10 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ था। इस दौरान वहां काफी तनाव देखा गया और सुरक्षा इंतजाम बढ़ा दिए गए थे। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कई लोगों को हिरासत में ले लिया था।
शुरुआती विरोध प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र समूहों व नागरिक समाज के संगठनों द्वारा किए गए थे। इन समूहों की मुख्य मांगें इस प्रकार थीं:
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा।
- चुनावी सूचियों के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को निलंबित करना।
प्रदर्शन स्थलों पर प्रतिबंध और नए विकल्प
इन घटनाओं के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब वहां प्रदर्शन करना प्रतिबंधित है।
गृह मंत्रालय ने सार्वजनिक प्रदर्शनों के लिए कुछ वैकल्पिक जगहों को निर्धारित किया है। अब प्रदर्शनों के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और CBD ग्राउंड जैसे स्थलों का उपयोग किया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्य और लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता
राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने के दौरान निहाल अहमद सिद्दीकी के साथ उनके कई सहयोगी भी मौजूद थे। इस प्रतिनिधिमंडल में सुशील कुमार यादव, दिलशाद हुसैन, एडवोकेट रमेश चंद त्रिपाठी, एडवोकेट शिव, एडवोकेट रोहित और रिज़वान शामिल थे।
यूनियन के अधिकारियों ने लोकतांत्रिक सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने अपने संगठन और संवैधानिक सुरक्षा उपायों के समर्थन में जमकर नारेबाजी भी की।

























