बाराबंकी के नागेश्वर नाथ मंदिर में भगवान राम के वनवास जाने की घटना पर आधारित राम वन गमन लीला का मंचन किया गया। इस कार्यक्रम में कलाकारों के अभिषेक और पूजन के बाद पौराणिक कथाओं के क्रम के अनुसार नाटक की प्रस्तुति दी गई।
लीला की शुरुआत राजा दशरथ द्वारा अपने चारों पुत्रों के विवाह के बाद उनके राज्याभिषेक की घोषणा से हुई। इस दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
रानी कैकेयी के वरदान और राम का वनवास
नाटक के दौरान उस भावुक क्षण को दिखाया गया जब रानी कैकेयी ने अपने दो वरदान मांगे। राजा दशरथ को अपने वचन पूरे करने के लिए राम को वनवास भेजने की सूचना देनी पड़ी।
इस दृश्य में दिखाया गया कि कैसे पिता के वचन को निभाने के लिए राम ने खुशी-खुशी वन जाने का निर्णय लिया। इस प्रसंग ने वहां मौजूद दर्शकों को काफी प्रभावित किया।
अयोध्या से प्रस्थान और तप्सा नदी का तट
मंचन में राम के महल छोड़कर वन की ओर जाने के दृश्य को जीवंत किया गया। राम के साथ लक्ष्मण और जानकी भी थीं और उनके लिए सुमंत द्वारा रथ चलाया गया।
अयोध्या के नागरिकों का राम, लक्ष्मण और जानकी से अलग होने का दृश्य इतना मार्मिक था कि वहां मौजूद सैकड़ों दर्शक भावुक हो गए। स्क्रिप्ट के अनुसार, भगवान राम ने अपने वनवास का पहला दिन तप्सा नदी के तट पर बिताया।
आयोजन का संचालन और उपस्थित अतिथि
इस पूरी प्रस्तुति का संचालन लीला व्यास प्रमोद पाठक ने किया। कार्यक्रम की जानकारी मीडिया प्रभारी नितेश मिश्रा द्वारा उपलब्ध कराई गई।
इस अवसर पर कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे, जिनमें शामिल थे:
- रमेश चंद्र कुरिल और पुरुषोत्तम तंडन
- राजेश गुप्ता कृष्णा और अंकित गुप्ता गोलू
- उमाकांत पांडे और राजीव पाठक
- राजजन, सुशील गुप्ता, प्रशांत सिंह और आर्यन तिवारी

























