मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) Gyanesh Kumar के खिलाफ दबाव बढ़ता जा रहा है। ‘INDIA’ गठबंधन के विपक्षी दलों ने उनके इस्तीफे की मांग को लेकर अपने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए हैं।
यह पूरा विवाद चुनावी सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ के आरोपों के बाद शुरू हुआ है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं हुई हैं।
इस आंदोलन को ‘Cockroach Janta Party’ (CJP) जैसे संगठन आगे बढ़ा रहे हैं। इस संगठन ने पहले पूर्व शिक्षा मंत्री Dharmendra Purohit के इस्तीफे के लिए अभियान चलाया था और अब वे इन दोनों मामलों के बीच समानताएं बता रहे हैं।
राहुल गांधी और कांग्रेस के गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर ‘अवैध चुनाव प्रमुख’ के रूप में काम करने का आरोप लगाया है।
Rahul Gandhi का दावा है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah, RSS प्रमुख Mohan Bhagat और CEC के बीच लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए मिलीभगत हुई है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उनके खिलाफ 45 FIR दर्ज हो चुकी हैं और इसे 100 तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
6 अक्टूबर 2026 को चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च करते समय Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi Vadra को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।
विपक्ष की मांगें और प्रदर्शन
कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने तीन ऐसी मांगें रखी हैं जिन्हें बदला नहीं जा सकता। उनकी मांगों में Gyanesh Kumar का इस्तीफा, वर्तमान SIR प्रक्रिया को रद्द करना और दोबारा पेपर बैलेट (कागजी मतपत्र) प्रणाली को लागू करना शामिल है।
विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी रहा और 7 अक्टूबर 2026 को Aam Aadmi Party (AAP) के कार्यकर्ता दिल्ली मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे, जिन्हें पुलिस ने बीच में ही रोक दिया।
- मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा।
- SIR प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करना।
- पेपर बैलेट की वापसी।
समाजवादी पार्टी के सांसद Dharmendra Yadav का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त पर से जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है।
अदालती कार्यवाही और प्रशासनिक संकट
इस संकट के बीच मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 5 अक्टूबर 2026 को कोर्ट ने Gyanesh Kumar को निलंबित करने से इनकार कर दिया, लेकिन भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से कुछ जरूरी सवाल पूछे।
कोर्ट ने फॉर्म 6 में बिना अनुमति के किए गए बदलावों के बारे में सवाल किया। साथ ही उन फैसलों पर जवाब मांगा गया जो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए थे। वरिष्ठ वकील Vikas Singh ने बताया कि CEC और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम की धारा 16 के तहत Kumar को सुप्रीम कोर्ट के जजों से भी ज्यादा कानूनी सुरक्षा मिली हुई है।
इसी बीच 98 पूर्व सिविल सेवकों ने एक खुला पत्र लिखा है। उन्होंने ECI पर आरोप लगाया है कि SIR के जरिए लाखों लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित किया गया है।
दौरे का रद्द होना और दिल्ली में हंगामा
इन विरोध प्रदर्शनों और तनाव के बीच Gyanesh Kumar का छत्तीसगढ़ दौरा रद्द करना पड़ा। 7 और 8 अक्टूबर को होने वाला उनका दो दिवसीय दौरा ‘अपरिहार्य कारणों’ से स्थगित कर दिया गया।
प्रदर्शनों की वजह से दिल्ली में यातायात व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई। सोशल मीडिया पर #ProtestCausingJam हैशटैग के साथ ट्रैफिक जाम की खबरें साझा की गईं।
इसी हंगामे के बीच राजधानी दिल्ली में एक ACP के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज होने की खबरें भी सामने आई हैं।









