बाराबंकी जिले के रामसनेहीघाट स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के संविदा कर्मचारियों ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को अपने विरोध प्रदर्शन के दूसरे दिन काली पट्टी बांधी। यह सांकेतिक प्रदर्शन उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में NHM संविदा कर्मचारियों द्वारा चलाए जा रहे राज्यव्यापी आंदोलन का हिस्सा है।
इस राज्यव्यापी आंदोलन की शुरुआत 5 अक्टूबर 2026 से हुई थी, जिसमें कर्मचारियों ने अपने कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया था। रामसनेहीघाट में आयोजित इस कार्यक्रम में कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन के दौरान भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष K.K. मिश्रा और NHM संविदा कर्मचारी यूनियन के जिला अध्यक्ष रामप्रताप सिंह ने कर्मचारियों को संबोधित किया। दोनों नेताओं ने कर्मचारियों से उनके हक की लड़ाई में मजबूती से साथ रहने की अपील की।
आंदोलन का अगला कार्यक्रम और कार्य बहिष्कार
यूनियन के जिला महासचिव डॉ. रईस खान ने आगामी विरोध प्रदर्शनों का पूरा शेड्यूल बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 8 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2026 तक जिला मुख्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों पर कर्मचारी कार्य बहिष्कार करेंगे।
हालांकि, कर्मचारियों ने यह साफ किया है कि इमरजेंसी सेवाओं को इस कार्य बहिष्कार से अलग रखा जाएगा ताकि मरीजों को परेशानी न हो। इसके साथ ही 8 अक्टूबर 2026 को जिला मुख्यालय पर एक धरना प्रदर्शन भी शुरू किया जाएगा।
नियमितीकरण और वेतन वृद्धि की मांगें
यूनियन के नेतृत्व ने सरकार को औपचारिक चेतावनी जारी की है कि उनकी पुरानी मांगों को जल्द पूरा किया जाए। कर्मचारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए।
- वेतन ढांचे में सुधार कर संशोधित वेतनमान लागू हो।
- कर्मचारियों को मिलने वाले अन्य लाभों में सुधार किया जाए।
यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि ये मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 12 अक्टूबर 2026 से लखनऊ में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।
विभिन्न जिलों में पहले दी गई थी चेतावनी
यह विरोध प्रदर्शन पिछले कई चेतावनियों और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों को दिए गए ज्ञापनों के बाद तेज हुआ है। इससे पहले बिजनौर और लखीमपुर खीरी जैसे विभिन्न जिलों में भी यूनियन प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी थी।
इन जिलों में यूनियन ने सरकार से कार्रवाई करने के लिए 3 अक्टूबर 2026 तक की समय सीमा तय की थी। अब समय सीमा समाप्त होने के बाद कर्मचारियों ने अपने आंदोलन को और अधिक आक्रामक बनाने का निर्णय लिया है।

























