समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 3 अक्टूबर, 2026 को ‘PDA संकल्प Gen-Z संवाद’ कार्यक्रम के दौरान युवाओं के लिए कई बड़े वादे किए। उन्होंने कहा कि वह आउटसोर्सिंग व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म कर देंगे।
अखिलेश यादव का दावा है कि आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों का शोषण किया जाता है और उन्हें स्थायी नौकरी नहीं दी जाती है। उन्होंने युवाओं को भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी सत्ता में वापस आने पर इस व्यवस्था को हटा देगी।
उन्होंने यह भी वादा किया कि सरकार में आने के बाद वह बड़े पैमाने पर सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया शुरू करेंगे। इसके लिए परीक्षाओं और नियुक्तियों के लिए एक निश्चित और समयबद्ध वार्षिक कैलेंडर लागू किया जाएगा।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुधार के कदम
अखिलेश यादव ने जोर देकर कहा कि इस ढांचागत बदलाव से छात्रों को होने वाली परेशानियों और मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति मिलेगी। वह भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे।
पारदर्शिता लाने के लिए वह निम्नलिखित कदम उठाएंगे:
- छात्रों को उनकी विस्तृत मार्क शीट (detailed mark sheets) उपलब्ध कराई जाएगी।
- क्वेश्चन पेपर लीक होने की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े इंतजाम किए जाएंगे।
इस घोषणा के बाद से राजनीतिक गलियारों में बहस शुरू हो गई है। कार्यक्रम के दौरान मशहूर शिक्षाविद् नीतू सिंह ने अखिलेश यादव के इस प्रस्ताव की सराहना की।
नीतू सिंह ने वर्तमान प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि भर्ती कैलेंडर की कमी और व्यवस्था की खामियों के कारण अक्सर कानूनी चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं।
भाजपा और सपा के बीच तीखी बहस
समाजवादी पार्टी के इन दावों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी और भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने सपा पर गंभीर आरोप लगाए।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि 2012 से 2017 के बीच समाजवादी पार्टी के शासनकाल में सरकारी नौकरियां ‘नीलामी’ के जरिए दी जाती थीं। उन्होंने कहा कि उस समय नौकरियों के लिए पहले से तय रेट तय किए गए थे।
इन आरोपों का जवाब देते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर पलटवार किया। उन्होंने वर्तमान प्रशासन की मानसिकता को ‘रूढ़िवादी’ बताया और कहा कि ऐसी सोच शिक्षा प्रणाली की प्रगति में बाधा डालती है।

























