Samajwadi Party के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने उत्तर प्रदेश में आउटसोर्सिंग व्यवस्था को पूरी तरह खत्म करने का अपना चुनावी वादा दोहराया है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी की सरकार बनती है, तो राज्य के युवाओं के लिए आउटसोर्सिंग के बजाय स्थायी सरकारी रोजगार की व्यवस्था की जाएगी।
लखनऊ में 3 अक्टूबर, 2026 को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान Akhilesh Yadav ने अपनी यह बात रखी। उन्होंने इस दौरान Bharatiya Janata Party (BJP) सरकार की आलोचना की और उन पर गंभीर आरोप लगाए।
Yadav ने दावा किया कि BJP सरकार की सोच रूढ़िवादी है। उनके अनुसार, इसी सोच की वजह से राज्य में शिक्षा और रोजगार के अवसरों में बाधाएं पैदा हो रही हैं।
परीक्षा कैलेंडर और भर्ती प्रक्रिया पर वादा
Akhilesh Yadav ने युवाओं को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार आने पर प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं के लिए एक समयबद्ध कैलेंडर लागू किया जाएगा। इससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और युवाओं को इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
उन्होंने बार-बार यह आरोप लगाया है कि वर्तमान आउटसोर्सिंग मॉडल और कॉन्ट्रैक्ट आधारित भर्ती युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने में नाकाम रहे हैं। उनका कहना है कि इस व्यवस्था से युवाओं को कोई स्थायी लाभ नहीं मिल रहा है।
पेपर लीक और आरक्षण पर गंभीर आरोप
Yadav ने वर्तमान प्रशासन पर सीधा आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग एजेंसियों के जरिए कमीशन कमाने के लिए जानबूझकर पेपर लीक कराए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि सरकार को स्थायी सरकारी पद देने की जिम्मेदारी से छुटकारा मिल सके।
इसके अलावा उन्होंने कई अन्य गंभीर दावे भी किए, जिनमें शामिल हैं:
- 11,000 पदों के प्रबंधन में भारी गड़बड़ी का दावा।
- आरक्षण कोटे की लूट का आरोप।
- उनके द्वारा जारी ऑडिट रिपोर्टों पर सरकार द्वारा कोई जवाब न देना।
यूपी सरकार की आउटसोर्सिंग नीति और कदम
दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश सरकार ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए कुछ कदम उठाए हैं। 2 अक्टूबर, 2026 को Basic Education Department में आउटसोर्सिंग स्टाफ के मानदेय में 25 प्रतिशत की वृद्धि लागू की गई।
इस बढ़ोतरी के बाद अब इन कर्मचारियों का मासिक मानदेय बढ़कर 23,200 रुपये हो गया है। सरकार का यह कदम कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए उठाया गया है।
वहीं, 9 जून, 2026 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी। इस बैठक में सरकार ने आउटसोर्सिंग एजेंसियों की एम्पैनलमेंट प्रक्रिया पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया।
इस नीतिगत पहल का उद्देश्य इन एजेंसियों के चयन और संचालन की प्रक्रियाओं को मानकीकृत करना और उनमें पारदर्शिता लाना है। इससे संकेत मिलता है कि वर्तमान सरकार इस व्यवस्था को खत्म करने के बजाय इसे रेगुलेट करने और सुधारने के पक्ष में है।

























