नई दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रमुख कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इकट्ठा होकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) Gyanesh Kumar के खिलाफ विरोध जताया है। प्रदर्शनकारियों ने भारतीय संविधान की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने की मांग की है।
इन प्रदर्शनकारियों ने संविधान निर्माताओं का हवाला देते हुए चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों पर गहरी चिंता जताई है। 3 अक्टूबर 2026 तक जंतर मंतर के आसपास का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
दिल्ली पुलिस ने 2 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के संबंध में अब तक कम से कम तीन FIR दर्ज की हैं। शनिवार, 3 अक्टूबर को अधिकारियों ने जंतर मंतर की ओर मार्च कर रहे लगभग 150 लोगों को हिरासत में ले लिया।
नेताओं और कार्यकर्ताओं की हिरासत और विरोध प्रदर्शन
हिरासत में लिए गए लोगों में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष Neha Bora, कार्यकर्ता Yogendra Yadav और वरिष्ठ वकील Prashant Bhushan शामिल हैं। इसके साथ ही National Students Union of India (NSUI) ने इंडिया गेट पर एक अलग प्रदर्शन किया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की गई।
दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है। इस आदेश के जरिए सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगा दी गई है, जिसे अब इंडियन यूथ कांग्रेस ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
Cockroach Janata Party (CJP) ने भी Gyanesh Kumar के इस्तीफे की अपनी मांग को दोहराया है। पार्टी ने घोषणा की है कि वे 10 अक्टूबर को दिल्ली में फिर से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करेंगे।
मतदाता सूचियों में गड़बड़ी के आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रिया
विपक्ष और INDIA गठबंधन के सदस्यों का आरोप है कि मतदाता सूचियों से 1.3 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से हटा दिए गए हैं। इन आरोपों के कारण यह दावा किया जा रहा है कि चुनाव आयोग (ECI) अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) का एक औजार बन गया है।
दूसरी ओर, BJP ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की प्रक्रिया सर्वसम्मति से पूरी की गई थी और विपक्ष केवल चुनावी हार की वजह से मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बना रहा है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए सहमति जताई है। इस याचिका में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की जांच के लिए SIT गठित करने की मांग की गई है।
लोकतांत्रिक अधिकारों और समर्थन पर कानूनी बहस
वकील Mehmood Pracha सहित कई कानूनी दिग्गजों ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की है। उन्होंने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए एक बड़ा खतरा बताया है।
इससे पहले 22 जुलाई 2026 को एक कार्यक्रम हुआ था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में अदालत परिसर में संविधान की प्रस्तावना (Preamble) पढ़ी थी।
वहीं, एक अलग मोर्चे पर अग्रवाल और वैश्य संगठनों ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया। इन संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar का समर्थन किया है और मांग की है कि उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए।

























