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भरत मिलाप का भव्य आयोजन: श्रद्धा और भक्ति का संगम

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Naradsamvad - Narad news Agency
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भरत मिलाप कार्यक्रम में खड़े स्वरूप

एडिटर के के शुक्ल/चंद्रोदय अवस्थी रामनगर (बाराबंकी)। जनपद बाराबंकी की तहसील रामनगर के ग्राम पंचायत गणेशपुर में स्थित श्री रामलीला मंच पर बृहस्पतिवार की रात्रि को भरत मिलाप का अत्यंत भव्य एवं भावनात्मक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर पूरा वातावरण “जय श्री राम” के उद्घोषों से गूंज उठा।

भरत मिलाप का यह प्रसंग भगवान श्रीरामचरितमानस के अयोध्या कांड का सबसे मार्मिक दृश्य माना जाता है। जब भरत, श्रीराम को वन से अयोध्या वापस लाने के लिए चित्रकूट पहुँचते हैं, तब चारों भाइयों—राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न—का मिलन होता है। यह दृश्य भाईचारे, प्रेम, त्याग और धर्म की मर्यादा का प्रतीक है। उसी पावन प्रसंग को मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

भरत मिलाप के सफल आयोजन में रामचंद्र प्रजापति एवं जग्गू शर्मा का विशेष सहयोग रहा, जिनके समर्पण एवं प्रयासों की प्रशंसा श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष प्रवीण कुमार अवस्थी ने की। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. जितेंद्र नाथ मिश्रा के आवास के सामने सुसज्जित मंच पर किया गया, जहाँ रंग-बिरंगी सजावट और मनमोहक प्रकाश व्यवस्था ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया।

कार्यक्रम के दौरान श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष प्रवीण कुमार अवस्थी, मीडिया प्रभारी के.के. शुक्ला, कलाकार प्रतिनिधि राजकुमार निगम, संदीप मिश्रा, मुन्ना रावत, चंद्रप्रकाश मिश्रा, मदन सोनी, बबलू गुप्ता, ऋतिक निगम, अंकुर मिश्रा, सौम्य मिश्रा, गौरव अवस्थी, मोहित अवस्थी, पुच्ची विश्वकर्मा, लाइटमैन प्रकाश, रामचंद्र गुप्ता, दीपांशु निगम, रामप्रकाश राठौर, वीरेंद्र सोनी एवं टिल्लू लाला सहित समस्त समिति सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान और भरत की आरती बारी-बारी से उतारी।

सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद

कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ बनाए रखने हेतु हेड कांस्टेबल योगेश सिंह, कांस्टेबल प्रदीप सिंह एवं जंग शेर सिंह चौहान मुस्तैदी से तैनात रहे। उनके सहयोग से कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।

भरत मिलाप के इस पावन आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को बल दिया, बल्कि मर्यादा, त्याग और भाईचारे के आदर्शों को भी पुनर्जीवित किया। यह कार्यक्रम समाज में एकता, प्रेम और भक्ति का उदाहरण बन गया।

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