तिरुत ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र से श्री बंसीधर ब्रजवासी और सारण टीचर्स निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. राहुल राज निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर बिहार विधान परिषद के लिए चुने गए थे। चुनाव जीतने के बाद इन दोनों सदस्यों ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ले ली है।
इस कदम के बाद भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल कानून को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। दसवीं अनुसूची के पैराग्राफ 2(2) के मुताबिक, यदि कोई निर्वाचित सदस्य जो निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में खड़ा हुआ था, चुनाव के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है, तो उसकी सदन की सदस्यता समाप्त कर दी जाती है।
संवैधानिक प्रावधान और अयोग्यता
संविधान के अनुच्छेद 191(2) में यह प्रावधान है कि दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित किया गया कोई भी व्यक्ति राज्य विधानमंडल का सदस्य बने रहने के योग्य नहीं होगा। दसवीं अनुसूची के पैराग्राफ 6(1) के अनुसार, दलबदल के आधार पर अयोग्यता का निर्णय लेने का अधिकार संबंधित सदन के सभापति के पास होता है। कानूनी विश्लेषकों का कहना है कि इन संवैधानिक प्रावधानों के चलते बंसीधर ब्रजवासी और डॉ. राहुल राज को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।
आरजेडी समर्थकों और तेजस्वी यादव सहित आलोचकों ने BJP पर संविधान और लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने साहेबगंज विधायक राजू सिंह के मामले का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि BJP चुनिंदा तरीके से नियमों को लागू करती है। उनका दावा है कि औपचारिक शिकायतों के बावजूद विपक्षी विधायकों की सदस्यता रद्द नहीं की जाती, जबकि अपने हितों के लिए कानून का इस्तेमाल किया जाता है।









