भारत निर्वाचन आयोग ने दिल्ली और पांच अन्य राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की समय सीमा बढ़ा दी है। इस प्रशासनिक बदलाव से मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए अधिक समय मिलेगा, साथ ही अधिकारियों को बड़ी संख्या में आवेदनों को संभालने में मदद मिलेगी।
चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, शेड्यूल बदलने का फैसला 29 अक्टूबर, 2026 को अंतिम रूप दिया गया था। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम विभिन्न मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से मिले अनुरोधों के बाद उठाया गया है। भविष्य के लोकतांत्रिक अभ्यासों की तैयारी में आयोग के लिए वोटर लिस्ट की शुद्धता एक मुख्य प्राथमिकता बनी हुई है।
सिर्फ दिल्ली में ही अधिकारियों ने हाल ही में 2.75 लाख से अधिक फॉर्म 6 आवेदनों पर कार्रवाई की है, जो वर्तमान पुनरीक्षण चक्र में जनता की भारी भागीदारी को दर्शाता है।
संशोधित समय सारिणी और महत्वपूर्ण तारीखें
दिल्ली में अब दावे दाखिल करने की अवधि बढ़ा दी गई है, जिसकी नई समय सीमा 25 नवंबर तय की गई है। राजधानी के संशोधित शेड्यूल में इन दावों के निपटारे की समय सीमा 15 दिसंबर है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 22 दिसंबर को प्रकाशित होने वाली है।
आदेश में बताए गए पांच अन्य राज्यों के लिए अलग समय सीमा लागू होगी। महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और नागालैंड के लिए अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर को जारी होने वाली है। हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया और ट्रिब्यून की रिपोर्ट पुष्टि करती हैं कि ये तारीखें संबंधित क्षेत्रों में अनिवार्य हैं।
गहन पुनरीक्षण की यह प्रक्रिया कई राज्यों में 31 अगस्त, 2026 को ड्राफ्ट रोल के प्रकाशन के साथ शुरू हुई थी। अधिकारियों ने पाया कि ड्राफ्ट रोल में बड़ी संख्या में नाम हटाए गए थे, जिससे मौजूदा दस्तावेजों की सटीकता की बारीकी से जांच करना जरूरी हो गया था।
सत्यापन प्रक्रिया और प्रशासनिक क्षमता
चुनाव विशेषज्ञों ने इस विस्तार को सत्यापन की भारी मात्रा और जमीनी हकीकत के प्रति एक व्यावहारिक प्रतिक्रिया बताया है। लाखों व्यक्तिगत अनुरोधों को संभालने के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता होती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंतिम वोटर रजिस्टर में हर नाम सही तरीके से शामिल या हटाया गया है।
राजनीतिक दल इस प्रक्रिया पर करीब से नजर रख रहे हैं, क्योंकि मतदाता सूची की संरचना चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि इस विस्तार से किसी भी समूह को नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन प्रशासनिक अपडेट की गति पर अलग-अलग दलों के अलग-अलग नजरिए होते हैं।
जिन मतदाताओं ने अभी तक अपने विवरण सत्यापित नहीं किए हैं या जिन्हें शुरुआती ड्राफ्ट प्रकाशन में गलतियों का सामना करना पड़ा है, उन्हें इस अतिरिक्त समय का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। यह विस्तार उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है जो साल की शुरुआत में तय समय सीमा से चूक गए होंगे।
जनता को पूरी जानकारी देने के लिए नई तारीखों का प्रचार तुरंत शुरू किया जाएगा। जमा किए गए दावों की प्रोसेसिंग मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की निगरानी में जारी रहेगी, जिसके बाद हालिया आदेशों के अनुसार रोल का औपचारिक प्रकाशन किया जाएगा।









