Skip to main content

Naradsamvad

कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की 10,000 करोड़ रुपये की योजना मंजूर

Naradsamvad
Naradsamvad - Narad news Agency
4 Min Read

केंद्रीय कैबिनेट ने 28 अक्टूबर, 2026 को एक नई कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम को मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ाना और आयात पर निर्भरता को कम करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस फैसले को औपचारिक रूप दिया गया।

Ad image

स्थानीय निर्माण फर्मों को समर्थन देने और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए 13 वर्षों की अवधि में 10,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। कैबिनेट ब्रीफिंग दस्तावेजों के अनुसार, यह मंजूरी कुल 29,267 करोड़ रुपये के चार प्रमुख घोषणाओं वाले व्यापक पैकेज का हिस्सा है।

लॉजिस्टिक्स उत्पादन में रणनीतिक बदलाव

भारत वर्तमान में आयातित कंटेनरों पर काफी निर्भर है, जिनमें से ज्यादातर चीन से आते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया और इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक व्यवधानों के दौरान यह निर्भरता घरेलू सप्लाई चेन के लिए जोखिम पैदा करती है। अधिकारियों का मानना है कि एक मजबूत स्थानीय आधार तैयार करने से इन भू-राजनीतिक जोखिमों को कम किया जा सकेगा और PM गति शक्ति पहल के व्यापक लक्ष्यों को समर्थन मिलेगा।

ALSO READ  वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में काजल धोचका और नीलम सिरोही ने जीते सिल्वर मेडल

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुष्टि की है कि यह फंडिंग वित्तीय वर्ष 2039-40 तक उपलब्ध रहेगी। इस योजना के तहत निर्माताओं के लिए कई महत्वपूर्ण परिचालन क्षेत्रों में सहायता दी जाएगी।

  • टर्म लोन पर 3 प्रतिशत प्रति वर्ष की ब्याज छूट, जिसके लिए 859 करोड़ रुपये आवंटित हैं।
  • भूमि लीजिंग, टेस्टिंग और आधिकारिक सर्टिफिकेशन प्रक्रियाओं के लिए समर्थन।
ALSO READ  शाहजहांपुर: मंडी डायरेक्टर जितेंद्र प्रताप सिंह ने रोजा मंडी का किया औचक निरीक्षण

इन प्रोत्साहनों का लाभ उठाने के लिए निर्माताओं को स्थानीय सामग्री की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करना होगा। नियमों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2031-32 के अंत तक न्यूनतम स्थानीय सामग्री की सीमा 70 प्रतिशत होनी चाहिए, जिसके बाद इसे बढ़ाकर 90 प्रतिशत कर दिया जाएगा।

उद्योग और रोजगार पर प्रभाव

इस पहल का लक्ष्य घरेलू निर्माताओं और स्टील फैब्रिकेशन से जुड़ी MSMEs सहित कई हितधारकों तक पहुँचना है। उम्मीद है कि शिपिंग लाइन्स और पोर्ट ऑपरेटरों को स्थानीय स्तर पर उत्पादित कंटेनरों की अधिक विश्वसनीय आपूर्ति का लाभ मिलेगा। इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा, यह योजना देश भर के मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हब में नए रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखती है।

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इस निवेश की सफलता केवल वित्तीय सहायता पर निर्भर नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबी अवधि के विकास के लिए पोर्ट दक्षता में सुधार और वर्कफोर्स स्किल्स में निवेश जैसे पूरक सुधार आवश्यक हैं। सरकार ने अभी तक आवेदन प्रक्रिया या कंपनियों के लिए विशिष्ट पात्रता मानदंडों की घोषणा नहीं की है।

ALSO READ  भारतीय रेलवे ने ट्रेनों में रात 11 से सुबह 5 बजे तक मोबाइल चार्जिंग पर लगाया बैन, आग के खतरे को रोकने के लिए फैसला

नोडल मंत्रालय यह सुनिश्चित करने के लिए कार्यान्वयन की निगरानी करेगा कि कंपनियां रोजगार और स्थानीय सामग्री के लक्ष्यों को पूरा करें। आने वाले हफ्तों में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होने के बाद संभावित निर्माता आवेदन प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे। कई घरेलू निर्यातकों का अनुमान है कि इस नीति से लंबे समय में उनकी कुल लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
Search
अपना ज़िला चुनें
error: Content is protected !!