मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में 25 अक्टूबर 2026 को नर्मदा नदी के तट पर बड़ी संख्या में वोटर आईडी कार्ड बरामद किए गए हैं। मांडलेश्वर घाट पर नदी के किनारे बिखरे हुए कुल 343 वोटर आईडी कार्ड मिले हैं। इस घटना के बाद पास की राऊ विधानसभा सीट की वोटर लिस्ट की शुद्धता को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं।
इन कार्ड्स की खोज निस्वार्थ सामाजिक सेवा समिति के स्वयंसेवकों ने की। ये स्वयंसेवक नदी की सफाई का अभियान चला रहे थे, तभी उन्हें किनारे पर ये कार्ड बिखरे हुए मिले। स्वयंसेवकों ने तुरंत इस बारे में प्रशासन को जानकारी दी।
सूचना मिलते ही एसडीएम के नेतृत्व में राजस्व टीम मौके पर पहुंची और इलाके को सुरक्षित किया। अधिकारियों ने बरामदगी का पंचनामा तैयार किया और आगे की जांच के लिए सभी 343 पहचान पत्रों को अपने कब्जे में ले लिया।
राऊ विधानसभा क्षेत्र से जुड़े हैं कार्ड
जब इन कार्ड्स की भौतिक जांच की गई, तो पता चला कि ये सभी राऊ विधानसभा क्षेत्र से संबंधित हैं। यह क्षेत्र उस जगह से लगभग 90 किलोमीटर दूर स्थित है जहाँ ये कार्ड मिले हैं। बरामद दस्तावेजों पर लिखे पते अलग-अलग इलाकों के हैं।
इन कार्ड्स पर तिलक नगर, आस्था पैलेस, श्रद्धा पुरी और आकाश नगर जैसे क्षेत्रों के पते दर्ज हैं। इस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भारतीय जनता पार्टी के विधायक मधु वर्मा कर रहे हैं। उन्होंने 2023 के चुनाव में 35,000 से अधिक वोटों के अंतर से अपनी सीट जीती थी।
कांग्रेस की शिकायत और पुलिस जांच
इस घटना के तुरंत बाद खरगोन जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नाइक ने मांडलेश्वर पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। कांग्रेस पार्टी ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। पार्टी ने यह भी आग्रह किया है कि नदी में और भी कार्ड छिपे हो सकते हैं, इसलिए पूरी नदी की गहन तलाशी ली जाए।
थाना प्रभारी पंकज तिवारी ने पुष्टि की है कि शिकायत मिल गई है और इसे आधिकारिक जांच के लिए भेज दिया गया है। एसडीओ पुलिस श्वेता शुक्ला ने कहा कि प्रशासन इस मामले को उच्च प्राथमिकता दे रहा है। वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इंदौर जिले के वोटर कार्ड खरगोन की नदी के किनारे कैसे पहुंचे।
चुनाव आयोग पर बढ़ा दबाव और राजनीतिक विवाद
वोटर कार्ड्स के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिससे भारत निर्वाचन आयोग पर दबाव बढ़ गया है। विपक्षी नेताओं ने इन तस्वीरों का इस्तेमाल यह दावा करने के लिए किया है कि वर्तमान वोटर लिस्ट संशोधन के दौरान वोटों की चोरी हो सकती है।
चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि मुख्य चिंता केवल कार्ड्स के खोने की नहीं है, बल्कि यह है कि क्या ये नाम अभी भी वोटर लिस्ट में सक्रिय हैं। हालांकि सभी वैध मतदाताओं के डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद हैं, लेकिन इन भौतिक दस्तावेजों का मिलना कस्टडी की चेन पर सवाल खड़े करता है।
- जांच एजेंसियां बरामद ईपीआईसी नंबरों का राऊ विधानसभा की आधिकारिक वोटर लिस्ट से मिलान करेंगी।
- यह बरामदगी स्थानीय प्रशासन और चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी परीक्षा है।
- यदि जांच में यह पाया गया कि कार्ड गलत तरीके से फेंके गए या यह चुनावी धोखाधड़ी का हिस्सा है, तो विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया पर असर पड़ेगा।
अभी तक अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि एफआईआर दर्ज हुई है या नहीं, या इन दस्तावेजों को फेंकने वाले किसी संदिग्ध की पहचान हुई है। इस पूरी घटना पर द टाइम्स ऑफ इंडिया, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस और इंडिया टुडे जैसे बड़े समाचार माध्यम नजर रख रहे हैं। राज्य सरकार और चुनाव अधिकारी अब अपने अगले कदमों की तैयारी कर रहे हैं और आगे की अपडेट पुलिस जांच और डेटाबेस सत्यापन पर निर्भर करेगी।









