भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। ISRO साल 2029 तक कुल चार फंक्शनल लॉन्च पैड स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। यह कदम सैटेलाइट लॉन्च करने की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उठाया जा रहा है।
ISRO के चेयरमैन V. Narayanan ने 24 अक्टूबर 2026 को चेन्नई में एक ग्रेजुएशन समारोह के दौरान इस विस्तार की घोषणा की। इस पूरी योजना का मुख्य आधार तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में बनाया जा रहा एक नया Small Satellite Launch Vehicle कॉम्प्लेक्स है, जो 2,000 एकड़ में फैला होगा।
इस नए प्रोजेक्ट का मकसद श्रीहरिकोटा में पहले से मौजूद और वहां योजनाबद्ध लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद करना है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने फरवरी 2024 में एक वर्चुअल इवेंट के जरिए कुलसेकरपट्टिनम कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखी थी।
कुलसेकरपट्टिनम कॉम्प्लेक्स का निर्माण और सुविधाएं
इस प्रोजेक्ट पर काम तेजी से चल रहा है। अगस्त 2025 तक अधिकारियों ने लॉन्च पैड की नींव रख दी थी। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कुल 33 प्रमुख सुविधाओं में से 32 का निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है।
कुलसेकरपट्टिनम साइट को बहुत ही आधुनिक बनाया जा रहा है। इसमें कई जरूरी सिस्टम शामिल होंगे, जैसे कि:
- इंटीग्रेशन बिल्डिंग्स
- लॉन्च पैड्स
- रेल-ट्रैक नेटवर्क
- एडवांस्ड टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड सिस्टम
इन सुविधाओं का उद्देश्य हर मिशन की सफलता को सुनिश्चित करना है। इन विवरणों को The Hindu, ET Now, Swarajya, the Assam Tribune और Times of India जैसे मीडिया संस्थानों ने कवर किया है।
निजी कंपनियों के साथ साझेदारी और भविष्य के लक्ष्य
चेयरमैन V. Narayanan ने साफ किया कि ISRO अपने ऑपरेशन्स का निजीकरण नहीं करेगा। इसके बजाय, एजेंसी निजी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप करेगी। ISRO इन कंपनियों को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और व्यावहारिक ट्रेनिंग देगा ताकि इस सेक्टर में हाई-टेक नौकरियों के अवसर बढ़ें।
लॉन्च पैड की संख्या बढ़ाने से श्रीहरिकोटा की भौतिक सीमाओं की समस्या हल हो जाएगी। अभी वहां केवल दो पैड हैं। जब चार सुविधाएं हो जाएंगी, तो एजेंसी सालाना लॉन्च की संख्या काफी बढ़ा सकेगी। इसका लक्ष्य साल में 50 लॉन्च तक पहुंचना है।
गगनयान मिशन और मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारी
इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ-साथ मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम भी प्राथमिकता पर है। V. Narayanan ने बताया कि गगनयान मिशन की मदद के लिए टीम ने लगभग 8,000 ग्राउंड-आधारित प्रयोग सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं।
अगले दो महीनों के भीतर पहली बिना चालक वाली (uncrewed) टेस्ट फ्लाइट की योजना है। अंतिम क्रूड लॉन्च से पहले कुल तीन बिना चालक वाली उड़ानें भरने की योजना बनाई गई है, जिनमें से यह पहली होगी।
कुलसेकरपट्टिनम कॉम्प्लेक्स के 2026 के अंत और 2027 के बीच पूरा होने की उम्मीद है। इन लक्ष्यों को पाने में निजी क्षेत्र की भूमिका अहम होगी। कमर्शियल ऑपरेशन्स को इंडस्ट्री पार्टनर्स को सौंपकर ISRO मुख्य तकनीकी विकास और गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण पर ध्यान दे सकेगा, जबकि निजी कंपनियां छोटे सैटेलाइट मिशन की फ्रीक्वेंसी बढ़ाएंगी। आने वाले महीनों में नए पैड और लॉन्च मैनिफेस्ट के बारे में और आधिकारिक अपडेट आने की संभावना है। ISRO को उम्मीद है कि इन निवेशों से भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी बनेगा।









