सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में बदलाव के लिए ड्राफ्ट संशोधन पेश किए हैं। इन नए नियमों के तहत ड्राइविंग ट्यूटोरियल के लिए पासिंग मार्क को बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने और कलर कोडेड लाइसेंस लागू करने का प्रस्ताव है।
सरकार का यह कदम देश में सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है। भारत में ट्रैफिक हादसों के कारण होने वाली मौतों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
Business Standard द्वारा बताए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में लगभग 1.83 लाख लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई। वहीं जुलाई 2026 के अंत तक के डेटा के मुताबिक, इस साल अब तक 1.01 लाख से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं।
ड्राइविंग टेस्ट और ट्यूटोरियल के नए मानक
भारत के राजपत्र (Gazette of India) में 21 अक्टूबर 2026 के आसपास प्रकाशित ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, अनिवार्य सुरक्षित ड्राइविंग ट्यूटोरियल के लिए क्वालीफाइंग मार्क को 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत किया जा रहा है।
Moneycontrol और The Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक, इन ट्यूटोरियल्स की अवधि कम से कम 30 मिनट होनी चाहिए। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ड्राइवर सड़क सुरक्षा के नियमों को पूरी तरह समझें।
लाइसेंस फॉर्मेट और मेडिकल जांच में बदलाव
The Tribune की रिपोर्ट के अनुसार, लाइसेंस के नए फॉर्मेट में अब ब्लड ग्रुप और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट के लिए अलग से कॉलम होंगे। इसके अलावा, मिर्गी या दौरे पड़ने वाली बीमारियों (seizure disorders) की मेडिकल जानकारी देना अब अनिवार्य होगा।
प्रस्ताव के मुताबिक, जो आवेदक मिर्गी की दवा ले रहे हैं, उन्हें लाइसेंस देने से मना किया जा सकता है। डेटा को आसानी से प्राप्त करने के लिए कार्ड पर मौजूद मशीन रीडेबल जोन को हटाकर QR कोड सिस्टम लगाया जाएगा।
भारतीय नागरिकों और विदेशी नागरिकों के पहचान पत्रों के लिए अलग-अलग कलर कोडेड फॉर्मेट होंगे। अब दस्तावेज के सामने वाले हिस्से पर ही नागरिकता का विवरण स्पष्ट रूप से लिखा होगा।
दस्तावेजों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में बदलाव
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, अब पहचान या पते के प्रमाण के लिए मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए हलफनामे (Affidavits) को मान्य नहीं माना जाएगा।
डिजिटल माध्यम को बढ़ावा देने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:
- अगर नाम या पते जैसे व्यक्तिगत विवरण आधार ऑथेंटिकेशन के जरिए ऑनलाइन अपडेट किए जाते हैं, तो उनकी फीस नहीं ली जाएगी।
- आरटीओ (Regional Transport Offices) में भ्रष्टाचार और कागजी कार्रवाई की दिक्कतों को कम करने का लक्ष्य है।
- लर्नर लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अब समय सीमा सात दिन के बजाय 15 दिन कर दी गई है।
नाम या पते में बदलाव के लिए एक नया फॉर्म 2A पेश किया गया है, जिस पर प्रशासनिक फैसले के लिए 15 दिन की समय सीमा तय है। एक प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि यदि सरकार 30 दिनों के भीतर पते में बदलाव के अनुरोध पर निर्णय नहीं लेती है, तो उसे स्वीकृत मान लिया जाएगा।
यदि कोई व्यक्ति किसी वाहन श्रेणी को सरेंडर करता है, तो उसे हटाने के लिए सात दिन की विंडो होगी, जिसके बाद उस विशिष्ट परमिट को दोबारा पाने पर एक साल का प्रतिबंध रहेगा।
इन नियमों पर जनता की प्रतिक्रिया के लिए अक्टूबर के मध्य से 30 दिनों की समय सीमा शुरू की गई है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय अंतिम नियम अधिसूचित करने से पहले सभी आपत्तियों की समीक्षा करेगा।
इच्छुक लोग अपडेट के लिए आधिकारिक राजपत्र को देख सकते हैं, क्योंकि ये नियम औपचारिक रूप से लागू होने के बाद ही प्रभावी होंगे। तब तक सभी ड्राइवरों के लिए मौजूदा प्रक्रियाएं ही लागू रहेंगी।









