नासिक के अंबड रिहायशी इलाके में जमीन के नीचे के पानी में हेक्सावलेंट क्रोमियम पाया गया है। यह एक ऐसा जहरीला तत्व है जिससे कैंसर होने का खतरा रहता है। जांच में इस तत्व की मात्रा सुरक्षित सीमा से 1,000 गुना अधिक पाई गई है।
यह गंभीर मामला 2026 के 28 सिंहस्थ कुंभ मेले से कुछ हफ्ते पहले सामने आया है। इससे स्थानीय निवासियों और मेले में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
अंबड महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम क्षेत्र के पास स्थित दत्ता नगर के निवासी सबसे पहले इस खतरे के प्रति जागरूक हुए। उन्होंने देखा कि उनके बोरवेल का पानी गहरे पीले रंग का हो गया है, जिसके बाद उन्होंने इस बारे में शोर मचाया।
पानी की जांच में खतरनाक नतीजे
साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल द्वारा स्वतंत्र जांच की गई। इस लैब रिपोर्ट के मुताबिक, पानी में कुल क्रोमियम की सांद्रता 50.5 mg/L पाई गई। इसमें हेक्सावलेंट क्रोमियम की मात्रा विशेष रूप से 50.3 mg/L दर्ज की गई है।
ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स के नियमों के अनुसार, पीने के पानी में क्रोमियम की मात्रा 0.05 mg/L से अधिक नहीं होनी चाहिए। 8 अक्टूबर 2026 को जारी लैब विश्लेषण के अनुसार, वर्तमान स्तर निर्धारित सीमा से 1,000 गुना से भी अधिक है।
प्रशासन की कार्रवाई और औद्योगिक इकाइयों पर शिकंजा
जिला कलेक्टर आयुष प्रसाद ने पुष्टि की है कि अधिकारी इस जहरीले कचरे के स्रोतों की पहचान कर रहे हैं। इसका मकसद आगे होने वाले प्रदूषण को रोकना है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, औद्योगिक निगम और जिला टीमों ने मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाया है।
इस कार्रवाई के दौरान 9 से 15 औद्योगिक इकाइयों को बंद करने या सील करने के नोटिस दिए गए हैं। इन फैक्ट्रियों पर आरोप है कि वे या तो अपने एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट नहीं चला रहे थे या बिना उपचार के औद्योगिक कचरा अवैध रूप से फेंक रहे थे।
प्रशासन ने कई जगहों पर बिजली और पानी के कनेक्शन भी काट दिए हैं ताकि कंपनियां नियमों का पालन करें। इसके अलावा, 9 अक्टूबर 2026 के आसपास जिला प्रशासन ने प्रभावित निवासियों को टैंकरों से पानी देना शुरू किया है।
स्वास्थ्य पर असर और लोगों की गंभीर हालत
आधिकारिक स्वास्थ्य जांच में अब तक 19 ऐसे निवासी मिले हैं जिन्हें इस जहरीले पानी के संपर्क में आने से त्वचा की बीमारियां हुई हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन और इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने हेक्सावलेंट क्रोमियम को ग्रुप 1 मानव कार्सिनोजेन के रूप में वर्गीकृत किया है।
रोशन केदार, राजेश पंडित और परिनीता डांडेकर जैसे कार्यकर्ताओं ने इलाके के करीब 25,000 निवासियों में कई लक्षणों की रिपोर्ट दी है। प्रभावित लोगों में निम्नलिखित समस्याएं देखी गई हैं:
- त्वचा पर छाले पड़ना
- क्रोम होल्स नामक केमिकल अल्सर होना
- लिम्फ नोड्स में सूजन आना
- दो मामलों में अचानक गर्भपात होना
इलाके के बच्चों के शरीर पर भी पीले रंग के बोरवेल पानी के संपर्क में आने से दाने और छाले देखे गए हैं, जिनकी तस्वीरें भी ली गई हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पानी उबालने से यह धातु नहीं हटती, इसलिए उबालना बेकार है।
कुंभ मेले पर खतरा और भविष्य की योजना
सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह जहरीला रसायन गोदावरी नदी तक पहुंच सकता है। कुंभ मेले के दौरान श्रद्धालु इसी नदी में पवित्र स्नान करते हैं। यह धार्मिक आयोजन 31 अक्टूबर 2026 को ध्वजारोहण समारोह के साथ शुरू होगा और 24 जुलाई 2028 तक चलेगा।
जिला अधिकारियों ने 11 और 12 अक्टूबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इस प्रदूषण की स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी दी। अब भविष्य के लिए कुछ कदम उठाए जा रहे हैं:
- पर्यावरण सर्वेक्षण जारी रखना
- ग्राउंडवाटर सर्वे एंड डेवलपमेंट एजेंसी के साथ मिलकर एक्विफर रेमेडिएशन प्लान बनाना
- लगातार मेडिकल निगरानी करना
प्रशासन अब यह तय कर रहा है कि ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ के तहत आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं या वित्तीय जुर्माना लगाया जाए। फिलहाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लिए गए पानी के नमूनों के पुष्ट परिणामों का इंतजार है।









