उत्तर प्रदेश के किसानों ने गन्ने की नई किस्म CoS.23232 के पहले बैच में उपलब्ध 2 लाख सिंगल बड्स को महज पांच मिनट में बुक कर लिया। यह बुकिंग 9 अक्टूबर 2026 को ऑनलाइन विंडो खुलने के तुरंत बाद हुई।
शाहजahanपुर में स्थित उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद ने अपने आधिकारिक पोर्टल के जरिए इस बुकिंग की सुविधा प्रदान की थी। किसानों के बीच इस नई किस्म की इतनी अधिक मांग रेड रोट यानी लाल सड़न रोग के गंभीर संकट के कारण है।
राज्य में इस बीमारी की वजह से 2019 से अब तक गन्ने के उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। इस संकट से निपटने के लिए किसान अब पुरानी Co.0238 किस्म को बदलकर नई किस्म अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।
लाल सड़न रोग का प्रभाव और नई किस्म की जरूरत
भारतीय चीनी अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। पिछले एक दशक से अधिक समय तक ICAR गन्ना प्रजनन संस्थान द्वारा 2009 में जारी की गई Co.0238 किस्म उद्योग का मानक बनी रही थी।
साल 2020 तक यह किस्म अपने चरम पर थी और राज्य के कुल गन्ना क्षेत्र के 86.7 प्रतिशत हिस्से पर इसकी खेती हो रही थी। शुरुआत में अधिक पैदावार की वजह से इसे काफी सफलता मिली, लेकिन बाद में CF13 नाम के एक खतरनाक रेड रोट पाथोटाइप ने इसे नुकसान पहुंचाया।
इस बीमारी के कारण एक ही किस्म की बड़े पैमाने पर खेती करना किसानों के लिए जोखिम बन गया। इसी समस्या के समाधान के लिए CoS.23232 किस्म का विकास किया गया, जिसे दस साल के परीक्षणों के बाद CoS.8119 और Co.775 के क्रॉसिंग से तैयार किया गया।
CoS.23232 किस्म की खासियत और पैदावार
सीड केन और गन्ना किस्म अनुमोदन उप-समिति ने सितंबर 2026 में आधिकारिक तौर पर इस किस्म को जारी करने की मंजूरी दी थी। परीक्षण के आंकड़ों के अनुसार, इस किस्म की औसत प्लांट क्रॉप पैदावार 95.56 टन प्रति हेक्टेयर रही है।
यह पैदावार पिछली Co.0238 किस्म की तुलना में 9.44 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा, रैटून पैदावार में भी सुधार देखा गया है, जो 80.57 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो पुरानी मानक किस्म से 3.16 प्रतिशत ज्यादा है।
चीनी की मात्रा के मामले में भी यह किस्म काफी बेहतर साबित हुई है। शोध परिषद के डॉ अरविंद कुमार और डॉ संजीव कुमार पाठक द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार चीनी का प्रतिशत इस प्रकार रहा:
- नवंबर महीने में चीनी की मात्रा 13.10 प्रतिशत दर्ज की गई।
- जनवरी तक यह बढ़कर 13.77 प्रतिशत हो गई।
- मार्च महीने में यह बढ़कर 14.05 प्रतिशत तक पहुंच गई।
यह किस्म जल्दी पकने, मोटे गन्ने और बेहतर टिलरिंग क्षमता के साथ रेड रोट के प्रति विशेष प्रतिरोधक क्षमता रखती है।
किस्मों में बदलाव और भविष्य की रणनीति
राज्य सरकार बीमारी के प्रकोप को रोकने के लिए छह पुरानी किस्मों को धीरे-धीरे हटाने की प्रक्रिया अपना रही है। CoS.23232 के अलावा, अधिकारियों ने हाल ही में CoS.19235, CoS.18232 और ICAR IISR लखनऊ की किस्म CoLk.21201 की खेती को मंजूरी दी है।
इन बदलावों की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि राज्य का चीनी उत्पादन 2019 के 126.4 लाख टन से गिरकर 2025-26 चक्र में 89.5 लाख टन रह गया था। निदेशक अभिषेक आनंद सहित अन्य अधिकारी अब मिठास मेला जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से वितरण को प्राथमिकता दे रहे हैं।
संसद में पेश केंद्रीय कृषि मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक, किस्मों के बदलाव से राज्य की औसत पैदावार 2023-24 के 81.34 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2025-26 में 81.97 टन प्रति हेक्टेयर हो गई है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि केवल एक ही किस्म पर निर्भर रहने से भविष्य में फिर से मोनोकल्चर की समस्या हो सकती है। स्थिरता के लिए विविध खेती और बीज गुणन कार्यक्रमों की सफलता जरूरी है।
परिषद अब किसानों की मदद के लिए लगभग 200 रुपये में 100 बड्स वाले मिनी सीड किट का उत्पादन बढ़ा रही है। अब यह देखा जाएगा कि यह किस्म शोध प्लॉटों से बाहर स्थानीय पाथोटाइप्स का कितना मुकाबला कर पाती है। चीनी मिलें और किसान 2026-27 के उत्पादन अनुमानों पर नजर रखेंगे कि क्या इन प्रयासों से उत्पादकता में गिरावट रुकती है। आने वाले महीनों में गुणन प्रक्रिया के विस्तार के साथ बड़े पैमाने पर इसकी बुआई होने की उम्मीद है।









