समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में पार्टी की चुनावी रणनीति को लेकर बात की। उन्होंने आने वाले राज्यसभा चुनावों में तीसरे उम्मीदवार को मैदान में न उतारने के फैसले पर अपनी बात रखी।
धर्मेंद्र यादव ने उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि क्रॉस वोटिंग के डर से यह कदम उठाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा दिए गए बयानों की सत्यता पूरी तरह बरकरार है।
सीटों की संख्या और वादों का प्रभाव
सांसद ने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी चाहती, तो उसके पास इतनी ताकत थी कि वह राज्यसभा की चार सीटें जीत सकती थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पार्टी के पास पर्याप्त संख्या बल मौजूद था।
हालांकि, उन्होंने समझाया कि नए उम्मीदवारों को उतारने के लिए टिकट वितरण को लेकर किए गए पुराने वादों को तोड़ना पड़ता। पार्टी अपने किए हुए वादों को तोड़ने के पक्ष में नहीं थी, इसलिए यह फैसला लिया गया।
भाजपा को लाभ से बचाने की रणनीति
धर्मेंद्र यादव के अनुसार, अगर पार्टी उन लोगों को उम्मीदवार बनाती जिन्हें वादा किया गया था, तो संभव था कि वे चुनाव हार जाते। ऐसी स्थिति में भविष्य की प्रतियोगिताओं में भारतीय जनता पार्टी को फायदा मिल सकता था।
भारतीय जनता पार्टी को किसी भी तरह का लाभ पहुँचाने से रोकने के लिए पार्टी नेतृत्व ने यह निर्णय लिया। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि उनका मुख्य ध्यान उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर है, न कि केवल तीन राज्यसभा सीटों पर।
चुनाव की तारीखें और भविष्य का लक्ष्य
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्यसभा चुनाव के नामांकन की प्रक्रिया 6 अक्टूबर 2026 को पूरी हो चुकी है। अब इस चुनाव के लिए मतदान 16 अक्टूबर 2026 को होना तय किया गया है।
समाजवादी पार्टी ने अब अपनी लंबी अवधि की रणनीतिक प्राथमिकता को पूरी तरह बदल दिया है। पार्टी का पूरा फोकस अब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों पर केंद्रित हो गया है।









