शाहजहांपुर में आयोजित एक वाल्मीकि शोभायात्रा के दौरान डीजे साउंड सिस्टम की बहुत तेज आवाज की वजह से स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। शोभायात्रा के साथ चल रहे इस डीजे की आवाज इतनी ज्यादा थी कि इसने आसपास के लोगों के बीच काफी तनाव पैदा कर दिया।
यह शोभायात्रा एक चौराहे पर करीब 30 मिनट तक रुकी रही। इस दौरान डीजे का संगीत उसी एक जगह पर बहुत तेज आवाज में बजता रहा, जिससे वहां मौजूद लोग और आसपास के निवासी बेहद असहज हो गए।
शोर से कांपने लगे शोरूम के शीशे और छतें
डीजे की आवाज इतनी तीव्र थी कि उसके प्रभाव से पास के शोरूम के कांच के पैनल और छतें तक कंपन करने लगीं। इस भारी शोर ने स्थानीय निवासियों के लिए स्थिति को बहुत मुश्किल बना दिया था।
इलाके में रहने वाले लोगों, खासकर दिल के मरीजों को इस शोर की वजह से अत्यधिक तकलीफ हुई। शोर का स्तर इतना अधिक था कि सामान्य जीवन जीना मुश्किल हो गया था।
अनसुनी की गईं स्थानीय लोगों की शिकायतें
निवासियों के अनुसार, कई लोग डीजे चलाने वाले ऑपरेटर के पास गए और उससे आवाज कम करने का अनुरोध किया। लेकिन ऑपरेटर ने उनकी बातों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया, जिससे लोगों में भारी गुस्सा फैल गया।
बाद में जब शोभायात्रा समिति के सदस्यों ने हस्तक्षेप किया, तब संगीत को थोड़ी देर के लिए रोका गया। हालांकि, जैसे ही शोभायात्रा आगे बढ़ना शुरू हुई, डीजे फिर से तेज आवाज में बजने लगा।
प्रशासन से नियंत्रण की मांग
स्थानीय लोगों का तर्क है कि खुले मैदानों में तेज आवाज वाला संगीत शायद ठीक हो, लेकिन घनी आबादी वाले इलाकों में यह बहुत कष्टदायक होता है। ऐसी जगहों पर संकरी गलियां, दुकानें और रिहायशी इमारतें होती हैं, जहां शोर का असर ज्यादा होता है।
स्थानीय समुदाय ने जिला प्रशासन से औपचारिक रूप से यह मांग की है कि:
- जिला प्रशासन डीजे ऑपरेटरों के साथ एक बैठक बुलाए।
- शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में तेज संगीत को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपाय लागू किए जाएं।









