भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने Avadhut Sathe Trading Academy Private Limited और इसके संस्थापक Avadhut Dinkar Sathe को प्रतिभागियों को 546.17 करोड़ रुपये वापस करने का आदेश दिया है। यह अंतिम आदेश 23 अक्टूबर, 2026 को जारी किया गया है।
यह कार्रवाई उन गैर-पंजीकृत निवेश सलाहकार सेवाओं के खिलाफ की गई है, जो वित्तीय शिक्षा के नाम पर चलाई जा रही थीं। नियामक ने पाया कि इस एकेडमी ने बिना पंजीकरण के रिसर्च एनालिस्ट की गतिविधियों को अंजाम दिया।
Bloomberg, The Economic Times, CNBC-TV18, Moneycontrol और Livemint की रिपोर्टों ने इस बात की पुष्टि की है कि नियामक ने एकेडमी की गतिविधियों को नियमों के विरुद्ध पाया। जांच में यह बात सामने आई कि एकेडमी ने शिक्षा की आड़ में निवेश की सलाह दी थी।
कोर्स फीस के नाम पर करोड़ों की वसूली
जुलाई 2017 से अक्टूबर 2025 तक की अवधि की जांच की गई। इस जांच में पाया गया कि एकेडमी और इसके संस्थापक ने अपनी शुरुआत से अब तक कोर्स फीस के रूप में लगभग 601.37 से 601.38 करोड़ रुपये जमा किए थे।
इस कुल राशि में से 546.17 करोड़ रुपये विशेष रूप से उन प्रोग्राम से जुड़े थे, जिनमें अनधिकृत निवेश सलाह दी जा रही थी। SEBI ने इसे नियमों का गंभीर उल्लंघन माना है।
भारी जुर्माना और बाजार से प्रतिबंध
नियामक ने अपने 171 पन्नों के अंतिम आदेश में सख्त वित्तीय दंड और परिचालन प्रतिबंध लगाए हैं। रिफंड राशि के अलावा, एकेडमी और Sathe को 10 अक्टूबर, 2025 से 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के हिसाब से 67.87 करोड़ रुपये Investor Protection and Education Fund में जमा करने होंगे।
कुल मौद्रिक जुर्माना 11.5 करोड़ रुपये तय किया गया है। इसमें से 6 करोड़ रुपये एकेडमी पर, 4 करोड़ रुपये Avadhut Sathe पर और 1.5 करोड़ रुपये डायरेक्टर Gouri Avadhut Sathe पर लगाए गए हैं।
Sathe और उनकी एकेडमी को दो साल के लिए या पूर्ण अनुपालन होने तक प्रतिभूति बाजार (securities market) से प्रतिबंधित कर दिया गया है। वहीं, Gouri Avadhut Sathe पर छह महीने का बाजार प्रतिबंध लगाया गया है। ये निर्देश PTI और अन्य वित्तीय समाचार आउटलेट्स द्वारा रिपोर्ट किए गए आधिकारिक आदेश पर आधारित हैं।
गलत तरीके से दी जा रही थी निवेश सलाह
जांचकर्ताओं ने पाया कि एकेडमी पेड लाइव सेशन और WhatsApp ग्रुप के जरिए शेयर खरीदने और बेचने के कॉल, प्राइस टारगेट और स्टॉप-लॉस लेवल बता रही थी। नियामक ने यह भी नोट किया कि संस्था ने भ्रामक प्रचार सामग्री का उपयोग किया।
एकेडमी ने बिना किसी अनिवार्य उपयुक्तता मूल्यांकन (suitability assessment) के केवल लाभदायक ट्रेडों को दिखाया। SEBI ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया कि ये गतिविधियां केवल शैक्षिक सामग्री का हिस्सा थीं।
दिसंबर 2025 के अंतरिम आदेश में पहले ही यह बात सामने आ गई थी कि इन प्रोग्रामों में 3.37 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। अब सभी संबंधित संस्थाओं को आदेश मिलने के पांच महीने के भीतर रिफंड की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
दावा प्रक्रिया को समझाने वाले सार्वजनिक नोटिस 30 दिनों के भीतर अंग्रेजी, हिंदी और स्थानीय भाषा के अखबारों में प्रकाशित करने होंगे। जुर्माने की राशि का भुगतान 45 दिनों के भीतर करना होगा।
- वितरण प्रक्रिया के बाद बची हुई कोई भी राशि एस्क्रो अकाउंट में रखी जाएगी।
- अंततः इस राशि को Investor Protection and Education Fund में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
जिन बाजार प्रतिभागियों ने इन विशिष्ट प्रोग्रामों के लिए फीस दी थी, उन्हें अपने फंड का दावा करने के तरीके जानने के लिए SEBI के चैनलों और आने वाले अखबार के नोटिसों पर नजर रखनी चाहिए। नियामक देश भर में शिक्षा से जुड़े इसी तरह के सलाहकार ऑपरेशनों की निगरानी कर रहा है।









