सरकारी कंपनी Oil India Limited ने कृष्णा गोदावरी बेसिन के मत्स्यपुरी फॉर्मेशन में प्राकृतिक गैस की खोज की है। यह खोज उथले तटीय जल क्षेत्र में की गई है, जहाँ पहले इस फॉर्मेशन का आकलन नहीं किया गया था।
कंपनी ने 24 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि Godavari 1 अप्रेजल वेल में उत्पादन परीक्षण सफल रहा है। इस कुएं के माध्यम से गैस की मौजूदगी की पुष्टि की गई है।
गैस की खोज के लिए हाइड्रोकार्बन युक्त जोन का परीक्षण 16 अक्टूबर 2026 को शुरू किया गया था। यह जोन 2,024 से 2,027 मीटर की गहराई पर स्थित है।
उत्पादन परीक्षण और गैस की मात्रा
ऑपरेशन से मिले आंकड़ों के अनुसार, गैस के बहाव की दर लगभग 1,00,000 मानक घन मीटर प्रति दिन दर्ज की गई। लगातार परीक्षण के दौरान कुएं में अधिकतम बहाव 2,00,000 मानक घन मीटर प्रति दिन तक पहुंच गया।
कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक, कंडेनसेट का उत्पादन 170 बैरल प्रति दिन रहा। इसका API ग्रेविटी 55.8 दर्ज किया गया और वेलहेड प्रेशर 1,815 पाउंड प्रति वर्ग इंच पाया गया।
Oil India Limited इस खोज वाले KG DSF GSKW 2018 Discovered Small Field ब्लॉक की एकमात्र ऑपरेटर है। कंपनी ने अभी तक इस विशिष्ट फॉर्मेशन में मौजूद संभावित संसाधनों का कोई अनुमान नहीं दिया है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा और लक्ष्य
भारत वर्तमान में अपनी प्राकृतिक गैस की मांग का लगभग आधा हिस्सा आयातित लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के जरिए पूरा करता है। कुल प्राथमिक ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी केवल 6 प्रतिशत है, जो वैश्विक औसत से काफी कम है।
सरकार का लक्ष्य घरेलू उत्पादन और बुनियादी ढांचे को बढ़ाकर 2030 तक इस हिस्सेदारी को 15 प्रतिशत तक ले जाना है। हाल के वर्षों में घरेलू उत्पादन 34 से 36 बिलियन घन मीटर के बीच रहा है।
आयात पर निर्भरता के कारण भारत पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव से होने वाले आपूर्ति व्यवधान और कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील रहता है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकारी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उत्पादन लक्ष्यों की निगरानी कर रहे हैं।
भविष्य की योजनाएं और चुनौतियां
Oil India ने 2006 में कृष्णा गोदावरी बेसिन में प्रवेश किया था और 2019 में DSF 2 ब्लॉक हासिल किया। कंपनी को अपनी संविदात्मक प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए कुएं खोदने और उत्पादन स्थापित करने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि यह खोज गहरे पानी की खोजों से छोटी है, लेकिन स्थापित बेसिनों से मिलने वाला कुल उत्पादन आयात वृद्धि को सीमित करने के लिए महत्वपूर्ण है। व्यावसायिक व्यवहार्यता यह तय करेगी कि यह खोज राष्ट्रीय लक्ष्यों में कितना योगदान देगी।
इस परियोजना के विकास के लिए निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:
- अतिरिक्त कुएं खोदने होंगे।
- पूर्वी तट पर पाइपलाइनों के साथ कनेक्शन बनाने होंगे।
Discovered Small Field पॉलिसी के तहत शुरुआती स्तर की खोजों का उद्देश्य गहरे पानी के स्थलों की तुलना में तेजी से मुद्रीकरण करना है। हालांकि, कुल वसूली योग्य संसाधन की मात्रा और बुनियादी ढांचे के लिए आवश्यक सटीक पूंजीगत व्यय को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है।
परियोजना से जुड़ी भविष्य की अपडेट स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के माध्यम से आने की उम्मीद है। कंपनी महानदी और अंडमान बेसिनों में अपने पोर्टफोलियो के तहत समानांतर अन्वेषण कार्य जारी रखे हुए है।









