फ्रांस में शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को महंगाई, जीवन यापन की बढ़ती लागत और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती के विरोध में व्यापक अशांति फैल गई। इस दौरान पेरिस, बोर्डो, ल्योन, मार्सिले, नाइस, नैनटेस, लिल, टूलूज़ और स्ट्रासबर्ग जैसे शहरों में प्रदर्शन हिंसक हो गए।
प्रदर्शनकारियों ने लिमोज सिटी हॉल को आग लगा दी, जो कि एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। 1883 में शुरू हुआ यह सिटी हॉल 140 साल पुराना था और इसने दो विश्व युद्धों का सामना किया था।
इस भीषण आग के कारण इमारत की छत पूरी तरह ढह गई और बाहरी हिस्से का लगभग दो-तिहाई हिस्सा नष्ट हो गया। हिंसा की यह लहर देश के कई प्रमुख शहरों में देखी गई।
महंगे शोरूम में लूटपाट और भारी भीड़
प्रदर्शनकारियों ने शहर के कई लग्जरी स्टोर में लूटपाट की। इसमें Apple, Louis Vuitton और Hermès जैसे बड़े ब्रांड के स्टोर शामिल थे। इसके अलावा, ल्योन में एक पर्यटन कार्यालय को भी आग लगा दी गई।
आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, पूरे देश में लगभग 5.5 लाख लोगों ने इन प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। हालांकि, आयोजकों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों की संख्या 8 लाख तक पहुंच गई थी, जिससे यह हाल के वर्षों के सबसे हिंसक प्रदर्शन बन गए हैं।
गिरफ्तारी और पुलिस अधिकारियों को चोट
गृह मंत्री Laurent Nuñez ने पुष्टि की कि शनिवार को अधिकारियों ने 400 लोगों को गिरफ्तार किया। बाद में प्रधानमंत्री Sébastien Lecornu ने जानकारी दी कि पूरे देश में गिरफ्तारियों की कुल संख्या 1,200 से अधिक हो गई है।
इस हिंसा के कारण कम से कम 150 पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं। झड़पों के दौरान एक प्रदर्शनकारी का हाथ ग्रेनेड की वजह से कट गया, जिसके बाद पुलिस ने छात्रों के खिलाफ कुछ खास तरह के ग्रेनेड के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और प्रदर्शन का विस्तार
राष्ट्रपति Emmanuel Macron सहित सरकारी अधिकारियों ने लूटपाट और हिंसा की कड़ी निंदा की है। Nuñez ने सार्वजनिक भवनों को निशाना बनाने के लिए सुदूर-वामपंथी चरमपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया है।
विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं। Jean-Luc Mélenchon ने विरोध प्रदर्शन आंदोलन का समर्थन किया, लेकिन खुद को लूटपाट से अलग रखा। वहीं, Marine Le Pen ने दंगाइयों की निंदा की।
यह अशांति पिछले महीने पेरिस में स्कूलों की स्थिति को लेकर शिक्षकों के विरोध प्रदर्शन से शुरू हुई थी। अब इसमें शामिल समूहों की सूची बढ़ गई है, जिनमें शामिल हैं:
- छात्र
- ट्रेड यूनियन
- किसान
- पेंशनभोगी

























