प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को व्हाट्सएप से जुड़े एक कथित स्टॉक मैनिपुलेशन घोटाले की जांच के लिए भारत के छह शहरों में एक साथ 29 ठिकानों पर छापेमारी की। यह पूरी कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई है।
इस जांच का मुख्य केंद्र R M Drip and Sprinklers Systems Ltd और R&B Denims Ltd नामक दो कंपनियां हैं। खबरों के मुताबिक, इन कंपनियों से जुड़े घोटाले के कारण एक लाख से ज्यादा रिटेल निवेशकों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है।
एजेंसी के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, यह छापेमारी मुंबई, नासिक, अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत और भावनगर में की गई। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य डिजिटल डिवाइस, लेनदेन के रिकॉर्ड और संपत्ति के दस्तावेजों को जब्त करना था।
कीमतों में हेरफेर और अवैध पैसों का लेन-देन
मुंबई जोनल ऑफिस I के मुताबिक, जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों से यह साफ हो पाएगा कि शेयरों की कीमतों में कितनी हेरफेर की गई और अवैध पैसों का प्रवाह किस तरह हुआ। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच इन खास शेयरों की कीमतों में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव देखा गया था।
एजेंसी द्वारा दिए गए आंकड़ों से पता चला है कि इन दो कंपनियों ने चुनिंदा व्यक्तियों और फर्मों को 3.5 करोड़ से ज्यादा शेयर और कन्वर्टिबल वारंट जारी किए थे। जांचकर्ताओं ने पाया कि इस छोटे समूह ने इन शेयरों का बड़ा हिस्सा अपने पास रखा और धीरे-धीरे बाजार में इनकी कीमतें बढ़ाते रहे।
व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए निवेशकों को फंसाया
दिसंबर 2025 के अंत से फरवरी 2026 तक, शेयरों की कृत्रिम मांग पैदा करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल मुख्य हथियार के रूप में किया गया। ‘Multibagger Stocks’ जैसे नामों से व्हाट्सएप कम्युनिटी बनाई गई थीं, जहां इन दोनों कंपनियों के शेयर खरीदने की लगातार सलाह दी जा रही थी।
इंडिया टुडे जैसी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन ग्रुप्स को गुजरात के भावनगर से मैनेज किया जा रहा था। हालांकि, इन ग्रुप्स के लिए इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड हरियाणा और मुंबई के तीसरे पक्ष के लोगों के नाम पर रजिस्टर्ड थे। इन डिजिटल टिप्स के बाद आम निवेशकों की दिलचस्पी इन शेयरों में अचानक बढ़ गई।
एजेंसी ने बताया कि इन दो काउंटरों में खरीदारों की संख्या लगभग 3,400 से बढ़कर एक लाख से ज्यादा हो गई। ये छोटे निवेशक इस विश्वास के साथ बाजार में आए कि उन्हें विकास के बड़े अवसर मिले हैं।
ग्रुप डिलीट होते ही डूबे निवेशकों के पैसे
इस पूरे खेल में 25 फरवरी 2026 को एक बड़ा मोड़ आया जब ये व्हाट्सएप ग्रुप अचानक डिलीट कर दिए गए। इसके तुरंत बाद दोनों कंपनियों के शेयर लोअर सर्किट पर पहुंच गए और कुछ ही दिनों के भीतर अपनी वैल्यू का लगभग 70 प्रतिशत खो बैठे।
ट्रेडिंग डेटा के अनुसार, NSE: RMDRIP के रूप में लिस्टेड R M Drip and Sprinklers Systems के शेयर 2026 की शुरुआत में 80 से 110 रुपये के बीच ट्रेड कर रहे थे। अक्टूबर 2026 तक आते-आते इसकी कीमत गिरकर 20 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गई। फ्री प्रेस जर्नल और ज़ी बिजनेस की मार्केट रिपोर्ट्स के मुताबिक, R&B Denims की वैल्यू में भी ऐसी ही भारी गिरावट देखी गई।
भविष्य की कानूनी कार्रवाई और रिस्क
इस घोटाले के शिकार निवेशक अब ऐसे शेयरों के साथ रह गए हैं जिन्हें बेचना मुश्किल है और उनके पास रिकवरी का कोई खास रास्ता नहीं बचा है। यह जांच प्रिफरेंशियल अलॉटमेंट और जुड़े हुए पक्षों द्वारा समन्वित ट्रेडिंग से जुड़े सिस्टमिक जोखिमों को उजागर करती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए शेयरों की कीमतें बढ़ाना और फिर अचानक बाहर निकल जाना मार्केट मैनिपुलेशन की एक पुरानी तकनीक है। प्रवर्तन निदेशालय अब उन लोगों की पहचान करने में जुटा है जिन्होंने इन प्रिफरेंशियल अलॉटमेंट के लिए फंडिंग की थी।
एजेंसी अब यह तय करेगी कि क्या जब्त किए गए डिजिटल सबूतों से विशिष्ट प्रमोटरों या ब्रोकरों का संबंध व्हाट्सएप ऑपरेशन्स से जुड़ता है। यदि मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप सही साबित होते हैं, तो भविष्य में संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई की जा सकती है।
इस मामले में मार्केट अनियमितताओं या डिस्क्लोजर उल्लंघन के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा भी समानांतर कार्यवाही की जा सकती है। प्रभावित निवेशक फिलहाल सिविल रिमेडी की उम्मीद कर रहे हैं, हालांकि जिन्होंने पीक प्राइस पर शेयर खरीदे थे, उनके लिए वित्तीय वसूली का रास्ता अभी अनिश्चित है।

























