कानपुर पुलिस और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने पनकी के इस्पात नगर में चल रहे नकली सीमेंट बनाने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस पूरे रैकेट का संचालन एक फैक्ट्री से किया जा रहा था जहाँ ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली सीमेंट तैयार किया जा रहा था।
इस फर्जीवाड़े का मुख्य मास्टरमाइंड नीरज गुप्ता और धीरज गुप्ता बताए जा रहे हैं। ये दोनों व्यक्ति ACC और Ambuja Cement के अधिकृत डीलर थे और अपनी इसी पहचान का फायदा उठाकर नकली सामान की सप्लाई कर रहे थे।
इस गिरोह में मेरठ के रहने वाले सुनील मित्तल और निशांत मित्तल भी शामिल थे। पुलिस ने जांच के बाद इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।
सस्ते और एक्सपायर सीमेंट से तैयार होता था नकली माल
जांच में सामने आया है कि यह गैंग बुंदेलखंड में होने वाली नीलामी से एक्सपायर हो चुका सीमेंट खरीदता था। एक बोरी सीमेंट की कीमत महज 10 से 20 रुपये के बीच थी।
इस पुराने और खराब सीमेंट को मिक्सर मशीनों में प्रोसेस किया जाता था। इसके बाद इसे ACC और Ambuja जैसे बड़े ब्रांड्स के प्रिंटेड बैग्स में पैक कर दिया जाता था।
एक बोरी को तैयार करने की लागत लगभग 30 रुपये आती थी। लेकिन बाजार में इस नकली सीमेंट को 250 रुपये से 280 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से बेचा जा रहा था।
लखनऊ एयरपोर्ट समेत कई सरकारी प्रोजेक्ट्स में सप्लाई
यह गिरोह हर महीने करीब 30,000 बोरियां नकली सीमेंट सप्लाई कर रहा था। यह घटिया सीमेंट लखनऊ एयरपोर्ट के निर्माण और 10 जिलों में बन रही सीएम ग्रिड सड़कों जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल किया गया।
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब Adani Group के सीनियर सेल्स मैनेजर मुमताजुल हक ने एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। Adani Group ही ACC और Ambuja Cement का मालिक है।
अडानी ग्रुप की विजिलेंस टीम ने पहले इन अवैध गतिविधियों की पुष्टि की और फिर इसकी सूचना पुलिस अधिकारियों को दी।
छापेमारी में भारी मात्रा में सामान जब्त और कानूनी कार्रवाई
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि नीरज और धीरज गुप्ता के पास पिछले तीन साल से डीलरशिप का अधिकार था। पुलिस ने 14 अक्टूबर 2026 को इस फैक्ट्री पर छापेमारी की।
इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने निम्नलिखित सामान जब्त किया है:
- नकली सीमेंट की 1,000 से ज्यादा बोरियां।
- 3,000 से अधिक खाली ब्रांडेड बैग।
छापेमारी के वक्त मौके से राहुल नाम के एक कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि मुख्य आरोपी अभी फरार हैं। पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
अधिकारी अब जब्त किए गए ट्रकों और दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। इसका मकसद सप्लाई चेन की पूरी जानकारी जुटाना और यह पता लगाना है कि सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में इस्तेमाल हुए इस घटिया सीमेंट की क्वालिटी कैसी थी।

























