2013 बैच की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को अपनी राजनीतिक पार्टी ‘जन नीति भारत’ की आधिकारिक शुरुआत कर दी है। उन्होंने 13 साल की सरकारी सेवा के बाद अपने पद से इस्तीफा दिया था।
दिव्या मित्तल की यह पार्टी साल 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लड़ने की तैयारी कर रही है। दिव्या मित्तल खुद मिर्जापुर सदर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने की योजना बना रही हैं।
दिव्या मित्तल IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु की पूर्व छात्रा रही हैं। उन्होंने प्रशासनिक सेवा के दौरान मिर्जापुर, देवरिया और संत कबीर नगर में जिला मजिस्ट्रेट (DM) के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं।
इस्तीफे की प्रक्रिया और पार्टी का मुख्य लक्ष्य
दिव्या मित्तल ने अपना इस्तीफा 30 अगस्त 2026 को सौंपा था। इस इस्तीफे को औपचारिक रूप से 14 सितंबर 2026 को स्वीकार कर लिया गया था।
उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी का मुख्य उद्देश्य नीति निर्धारण में जनता की भागीदारी को केंद्र में रखना है। पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सरकार केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि अपने पूरे पांच साल के कार्यकाल में जवाबदेह रहे।
जन नीति भारत के वादे और डिजिटल योजनाएं
पार्टी ने अपने मुख्य संकल्पों में जनता केंद्रित नीतियों को प्राथमिकता दी है। इसमें बिना किसी भेदभाव के जरूरतों के आधार पर निर्णय लेना और सरकारी कामकाज में पूरी पारदर्शिता रखना शामिल है।
पार्टी की योजनाओं में नागरिकों के मोबाइल फोन पर सरकारी योजनाओं, बजट और विकास कार्यों का रीयल-टाइम डेटा सीधे उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अलावा, पार्टी एक डिजिटल रेटिंग सिस्टम लागू करना चाहती है।
- नागरिक इस सिस्टम के जरिए स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों का मूल्यांकन कर सकेंगे।
- रेटिंग के लिए हरे, पीले और लाल रंगों के कोड का इस्तेमाल किया जाएगा।
- महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करना पार्टी की मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल है।
- स्थानीय शासन में जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
चुनावी रणनीति और जनसंपर्क का तरीका
दिव्या मित्तल ने अपनी चुनावी रणनीति के बारे में बताया कि ‘जन नीति भारत’ पारंपरिक विज्ञापनों वाले प्रचार के तरीके को नहीं अपनाएगी। पार्टी जमीनी स्तर पर घर-घर जाकर संपर्क करने के तरीके पर जोर देगी, क्योंकि फिलहाल संगठन के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं हैं।
राजनीति में आने से पहले दिव्या मित्तल ने इस बारे में जनता की राय मांगी थी। इस दौरान उनके संचार माध्यमों पर इतना दबाव बढ़ा कि उन्हें व्हाट्सएप छोड़कर गूगल फॉर्म का सहारा लेना पड़ा, ताकि लोगों से फीडबैक लिया जा सके।

























