Madhya Pradesh Congress President Jitu Patwari ने BJP सरकार पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi और पूर्व मुख्यमंत्री Shivraj Singh Chouhan पर Ladli Behna Yojana के लाभार्थियों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है।
Bhopal में मीडिया से बात करते हुए Patwari ने कहा कि सरकार ने महिलाओं को धोखा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मासिक वित्तीय सहायता को 3,000 रुपये तक बढ़ाने की ‘Modi Guarantee’ अब तक पूरी नहीं हुई है, जबकि लाभार्थी अभी केवल 1,500 रुपये ही प्राप्त कर रहे हैं।
Patwari ने राज्य की महिला आबादी और योजना के दायरे पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि राज्य में 4 करोड़ से अधिक महिलाएं हैं, लेकिन इनमें से केवल 1.25 करोड़ महिलाएं ही लाभ ले पा रही हैं, जिससे लाखों महिलाएं योजना से बाहर रह गई हैं।
पोर्टल और पंजीकरण को लेकर प्रशासनिक भ्रम
जीतू पटवारी ने सरकार की आंतरिक प्रशासनिक विसंगतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार के भीतर तालमेल की कमी है क्योंकि एक मंत्री कह रहे हैं कि पात्र महिलाओं को शामिल करने के लिए पंजीकरण पोर्टल फिर से खुलेगा, जबकि दूसरे मंत्री का कहना है कि यह बंद रहेगा।
उन्होंने इन विरोधाभासी संकेतों को चुनावी लाभ के लिए महिलाओं को गुमराह करने की एक सोची-समझी कोशिश बताया। Patwari ने BJP को ‘धोखेबाज सरकार’ करार देते हुए दावा किया कि महिलाएं 2028 के चुनावों में इसका करारा जवाब देंगी।
किस्त वितरण और लाभार्थियों की संख्या
यह राजनीतिक विवाद राज्य में हालिया घटनाक्रमों के बाद शुरू हुआ है। मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav ने 14 अक्टूबर 2026 को Umaria जिले से लगभग 1.25 करोड़ लाभार्थियों को 1,500 रुपये की 41वीं किस्त जारी की थी।
वहीं, 15 अक्टूबर 2026 को स्वास्थ्य राज्य मंत्री Narendra Shivaji Patel ने संकेत दिया था कि नए आवेदकों के लिए पंजीकरण पोर्टल जल्द ही फिर से खुल सकता है। हालांकि, सरकारी आंकड़े एक अलग तस्वीर दिखाते हैं।
पात्रता नियमों और भविष्य के वादों का विवरण
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पात्रता मानदंडों में बदलाव के कारण पिछले तीन वर्षों में योजना से कई महिलाओं के नाम हटाए गए हैं।
- पिछले तीन वर्षों में 6.26 लाख से अधिक महिलाओं को लाभार्थी सूची से बाहर कर दिया गया है।
- राज्य सरकार का दावा है कि मासिक सहायता को 3,000 रुपये तक बढ़ाना उनकी एक लंबी अवधि की प्रतिबद्धता है।
सरकार का कहना है कि पंजीकरण और कवरेज से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद, 2028 तक सहायता राशि बढ़ाने का उनका संकल्प कायम है।

























