सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी सीबीआई ने सरकारी कंपनी Munitions India Limited के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार को गिरफ्तार किया है। उनके साथ ही एक प्राइवेट फर्म SMPP Limited के सीईओ आशीष कंसल को भी रिश्वतखोरी के एक मामले में पकड़ा गया है। यह पूरा मामला 500 करोड़ रुपये के एक कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा हुआ है।
जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई उन आरोपों के बाद की है जिनमें रक्षा उत्पादन से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को पैसों के बदले साझा करने की बात सामने आई थी। अनिल कुमार Munitions India Limited के पुणे मुख्यालय में लेवल 14 ग्रेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर तैनात हैं।
सीबीआई ने अनिल कुमार के भाई बी. हर्षवर्धन को भी हिरासत में लिया है। उन पर अपराध से कमाई गई रकम को छिपाने में मदद करने का आरोप है।
रिश्वत के बदले कॉन्ट्रैक्ट और सीबीआई की छापेमारी
जांच एजेंसी ने 12 अक्टूबर 2026 को एक एफआईआर दर्ज की थी। यह एफआईआर इस खुफिया जानकारी के आधार पर लिखी गई थी कि अनिल कुमार आधिकारिक मदद के बदले वेंडरों से रिश्वत मांग रहे थे। एफआईआर में खास तौर पर SMPP Limited को दिए गए उस कॉन्ट्रैक्ट का जिक्र है, जिसके तहत कंपनी को Munitions India Limited को गोला-बारूद की सप्लाई करनी थी।
इस मामले की गहराई तक जाने के लिए सीबीआई ने पुणे, मैसूरु, बेंगलुरु और दिल्ली में एक साथ छापेमारी की। इन तलाशी अभियानों के दौरान एजेंसी ने कुल 2.23 करोड़ रुपये नकद और कई जरूरी दस्तावेज बरामद किए।
बरामदगी के विवरण के अनुसार, पुणे में अनिल कुमार के ठिकानों से 1.73 करोड़ रुपये मिले। इसके अलावा अन्य शहरों में की गई छापेमारी के दौरान 50 लाख रुपये और जब्त किए गए। सीबीआई ने 14 अक्टूबर 2026 को जारी एक सार्वजनिक बयान में इन बरामदगियों की पुष्टि की।
पैसों के लेन-देन और साजिश का जाल
सीबीआई के एजेंटों का आरोप है कि अनिल कुमार ने अपने भाई को आशीष कंसल से मिलने वाले पैसों को इकट्ठा करने और छिपाने के निर्देश दिए थे। रिकॉर्ड्स में आरोपी अधिकारी की पत्नी चेतनाश्री का नाम भी आया है। उन पर इन अवैध पैसों को घुमाने और अपने पास रखने में शामिल होने का आरोप है।
एफआईआर में SMPP Limited के एक कर्मचारी रवित कुमार तेवतिया की पहचान एक संपर्क व्यक्ति के रूप में की गई है। रवित कुमार तेवतिया ही अनिल कुमार के साथ तालमेल बिठाने और बातचीत करने का काम कर रहे थे।
जांच एजेंसी का दावा है कि संवेदनशील डेटा साझा करने की यह साजिश राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों और रक्षा खरीद की ईमानदारी को खतरे में डाल सकती थी।
संबंधित संगठनों का विवरण और वर्तमान स्थिति
Munitions India Limited साल 2021 में स्थापित एक डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग है। इसका गठन ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के कॉरपोरेटाइजेशन के बाद हुआ था ताकि 12 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का प्रबंधन किया जा सके। यह कंपनी सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक बलों के लिए रॉकेट, मोर्टार, गोला-बारूद और विस्फोटक बनाती है और इसमें 22,500 से 25,000 कर्मचारी काम करते हैं।
दूसरी ओर, SMPP Limited एक प्राइवेट मैन्युफैक्चरर है जो बुलेटप्रूफ जैकेट, हेलमेट, ड्रोन और गोला-बारूद बनाने पर केंद्रित है। इस कंपनी के हरियाणा में प्लांट हैं और यह भारतीय सुरक्षा बलों को सुरक्षा उपकरण सप्लाई करती रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि रक्षा क्षेत्र में अब प्राइवेट कंपनियों की भूमिका बढ़ गई है, लेकिन मुख्य गोला-बारूद के उत्पादन में अभी भी पब्लिक सेक्टर ही प्राथमिक उत्पादक है। रक्षा मंत्रालय के लिए स्वदेशी क्षमता बढ़ाने के दौरान डेटा को सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
अब सभी आरोपी व्यक्तियों को कानूनी कार्यवाही के लिए एक सक्षम मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। सीबीआई संभवतः जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की जांच करने और पैसों के पूरे प्रवाह का पता लगाने के लिए कस्टोडियल पूछताछ की मांग करेगी।
गिरफ्तारियों के सार्वजनिक खुलासे के बाद Munitions India Limited या रक्षा मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

























