उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 12 अक्टूबर 2026 को संविदा और आउटसोर्सिंग पर काम करने वाली महिला एएनएम (ANM) कर्मियों ने एक बड़ा प्रदर्शन किया। इन कर्मचारियों ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के राजभवन कॉलोनी स्थित आवास के बाहर अपनी मांगें रखीं।
यह प्रदर्शन लगातार छठे दिन जारी था, जिसमें बड़ी संख्या में महिला स्वास्थ्यकर्मी एकत्रित हुईं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग अपनी नौकरियों को नियमित करना है ताकि उन्हें स्थायी रोजगार मिल सके।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हस्तक्षेप किया और सभी प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाकर इको गार्डन स्थित विरोध स्थल पर भेज दिया।
वेतन विसंगति और मुख्य मांगें
प्रदर्शन कर रही महिला कर्मियों ने वेतन में भारी अंतर का मुद्दा उठाया है। उन्होंने बताया कि संविदा ANM कर्मियों को हर महीने लगभग 11,500 रुपये मिलते हैं, जबकि स्थायी ANM स्टाफ को 50,000 रुपये से अधिक वेतन दिया जाता है।
कर्मचारियों ने ‘समान काम के लिए समान वेतन’ की मांग की है और चाहते हैं कि उन्हें उनके गृह जिलों में ही तैनात किया जाए। इसके अलावा उन्होंने अपनी अन्य जरूरी मांगों की सूची भी पेश की है:
- स्थायी रोजगार का दर्जा मिलना।
- स्वास्थ्य बीमा की सुविधा प्रदान करना।
- EPF योगदान को नियमित करना।
- कैशलेस मेडिकल सुविधाएं देना।
- राज्य कर्मचारियों का दर्जा मिलना।
- 45 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए आयु सीमा हटाना।
भ्रष्टाचार के आरोप और चुनाव की चेतावनी
इको गार्डन में 9 अक्टूबर 2026 से कुछ कर्मचारी भूख हड़ताल पर भी बैठे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक को ज्ञापन सौंपे थे, लेकिन उन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
कर्मचारियों ने मंत्री के एक कथित बयान का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि प्रशासन संविदा ANM कैडर को मान्यता नहीं देता है। इस घटनाक्रम के बीच नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के संविदा कर्मचारियों द्वारा चलाए जा रहे ‘लखनऊ चलो’ अभियान के तहत विभिन्न जिलों से कर्मचारी राजधानी पहुंचे हैं।
महिला कर्मचारियों ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वर्तमान सरकार को 2027 के राज्य विधानसभा चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

























