Skip to main content

Naradsamvad

[post-views]

कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं ने दिल्ली पुलिस पर लगाया अवैध हिरासत और मोबाइल डिवाइस से छेड़छाड़ का आरोप

Cockroach Janta Party (CJP) के मुख्य प्रवक्ता Sourav Das ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पुलिस पर अवैध हिरासत में रखने और मोबाइल डिवाइसों को बिना अनुमति जब्त करने और उनमें छेड़छाड़ करने का दावा किया है।

Ad image

इस मामले में Sourav Das के साथ सह-संयोजक Ashutosh Ranka और Abhijeet Deepke भी शामिल थे। इन नेताओं को शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पहुंचते ही विमान से उतरते समय हिरासत में ले लिया गया था।

ये नेता मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली आए थे। हिरासत में लिए जाने के बाद, इन तीनों को रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया।

मजिस्ट्रेट कोर्ट से रिहाई और मोबाइल डिवाइस पर सवाल

अदालत ने तीनों नेताओं को 50,000 रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड पर रिहा कर दिया। यह रिहाई इस शर्त पर की गई कि वे सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखेंगे। Sourav Das ने कहा कि उनके फोन 24 घंटे से अधिक समय तक पुलिस की हिरासत में रहे।

Das का आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने मोबाइल जब्त करने का अनिवार्य मेमो उपलब्ध नहीं कराया। उन्होंने चिंता जताई कि उनके डिवाइस को हैक या क्लोन किया गया होगा। उन्हें डर है कि अधिकारी भविष्य में उनके खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए डिवाइस में आपत्तिजनक दस्तावेज या सबूत डाल सकते हैं।

नागरिक स्वतंत्रता और डेटा लीक के आरोप

Sourav Das ने इस पूरी स्थिति की तुलना 1975 के आपातकाल से की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन Gyanesh Kumar को बचाने के लिए नागरिक स्वतंत्रता को कम कर रहा है, यात्राओं पर रोक लगा रहा है और इंटरनेट सेवाओं को बाधित कर रहा है।

ALSO READ  बिहार सरकार द्वारा SC-ST महिलाओं को अंतरजातीय विवाह करने पर ढाई लाख रुपये देने की योजना

डेटा ब्रीच के संबंध में Das ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने उनका फोन नंबर लीक कर दिया। उन्होंने बताया कि आंतरिक दस्तावेज और उनके विरोध प्रदर्शन की अनुमति खारिज करने वाला पत्र प्रसारित होने के बाद उन्हें एक घंटे में 300 से अधिक कॉल और कई WhatsApp संदेश मिले।

Das ने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई को “अपहरण” करार दिया। उन्होंने दावा किया कि पुलिस अधिकारी बिना किसी औपचारिक नोटिस या हिरासत के आधार के उनके विमान में सवार हुए और उन्हें कानूनी वकील से मिलने नहीं दिया गया।

पुलिस का पक्ष और अदालती निर्देश

दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया है। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत निवारक हिरासत के रूप में की गई थी। पुलिस ने दावा किया कि सभी कानूनी प्रोटोकॉल का पालन किया गया।

इस विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पुलिस से कहा है कि वह मेट्रो और रेलवे सेवाओं की कार्यक्षमता सुनिश्चित करे, इंटरनेट कनेक्टिविटी बनाए रखे और कानून के अनुसार शांतिपूर्ण और निहत्थे नागरिकों के साथ व्यवहार करे।

इस मामले में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने भी इन गिरफ्तारियों पर चिंता व्यक्त की है। भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की इस चिंता को खारिज करते हुए इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया है।

अन्य खबरे

गोल्ड एंड सिल्वर

Our Visitors

1594990
Total Visitors
error: Content is protected !!