6 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी (SP) के समर्थकों ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को हिरासत में लिए जाने के विरोध में आयोजित किया गया था।
लखनऊ में प्रदर्शनकारियों ने हजरतगंज चौराहे पर भारी भीड़ जमा की और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस घटना के बाद राज्य के कई इलाकों में तनावपूर्ण माहौल देखा गया।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब दिल्ली पुलिस ने अखिलेश यादव को हिरासत में ले लिया। वह INDIA गठबंधन के नेतृत्व में चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ निकाल रहे थे।
लखनऊ और अन्य जिलों में प्रदर्शन की स्थिति
लखनऊ के हजरतगंज के अलावा सपा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में विधान भवन और जन भवन पर भी इकट्ठा हुए। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की भारी तैनाती की गई थी।
पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया और उन्हें इको गार्डन पहुंचा दिया। लखनऊ के अलावा वाराणसी, कानपुर, सुल्तानपुर और कौशाम्बी जैसे जिलों में भी केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ प्रदर्शन हुए।
दिल्ली में सांसदों का मार्च और हिरासत
इस ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ में कांग्रेस, NCP और तृणमूल कांग्रेस समेत 19 पार्टियों के लगभग 150 विपक्षी सांसद शामिल हुए थे। ये सभी सांसद उपचुनावों में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध जता रहे थे।
जब मार्च के रास्ते में रुकावट डाली गई, तो 100 से ज्यादा विपक्षी सांसदों ने सड़कों पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने लोक कल्याण मार्ग के पास अखिलेश यादव को हिरासत में ले लिया, हालांकि उन्हें उसी रात देर से रिहा कर दिया गया।
अखिलेश यादव के आरोप और प्रतिक्रिया
इस पूरी स्थिति पर अपनी बात रखते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी के सदस्य संघर्ष और कड़ी मेहनत से नहीं डरते हैं। उन्होंने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को बीजेपी की घबराहट का संकेत बताया।
उन्होंने चुनावी गड़बड़ियों के अपने आरोपों को दोहराया और दावा किया कि ‘PDA’ (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) मिलकर बीजेपी को हराएंगे।

























