कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने 6 अक्टूबर, 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च निकाला। इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत सुबह 10:30 बजे संसद भवन के मकर द्वार से हुई। प्रदर्शनकारियों का लक्ष्य भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के मुख्यालय तक पहुंचना था।
इस दौरान दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली में धारा 163 लागू कर दी। पुलिस ने नीति आयोग कार्यालय के पास मार्च को रोक लिया और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख नेता और दल
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी कर रहे हैं। इनके साथ कई अन्य विपक्षी दल भी इस मार्च में शामिल हुए।
- अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी
- अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC
- NCP (SP)
- संजय राउत के प्रतिनिधित्व वाली शिव सेना (UBT)
- RJD
- CPI(M)
हालांकि, कुछ प्रमुख दल इस प्रदर्शन से दूर रहे। DMK, आम आदमी पार्टी, BJD, अकाली दल, BRS और YSRCP ने इस प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा बदलाव किए। उनका दावा है कि इन बदलावों का उद्देश्य सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लाभ पहुंचाना है।
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर अपने पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया। वहीं, कपिल सिब्बल ने इन कार्यों को “वोट चोरी” और “राजद्रोह” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुमार ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। पी. चिदंबरम ने चेतावनी दी कि यदि CEC इस्तीफा नहीं देते हैं, तो यह आंदोलन और तेज किया जाएगा।
अधिकारियों की चिंता और आयोग का जवाब
पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों ने भी ज्ञानेश कुमार के आचरण पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने एक चार्जशीट और महाभियोग का नोटिस सौंपा है। अधिकारियों का कहना है कि कुमार के कार्य सिविल सेवा की गरिमा और भारत की लोकतांत्रिक साख के लिए हानिकारक हैं।
विरोध के दौरान विपक्षी सांसदों ने बैनर दिखाए और ज्ञानेश कुमार के कटआउट लेकर चले, जिनमें उन्हें RSS की पोशाक में दिखाया गया था।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने 27 सितंबर, 2026 को एक बयान जारी किया था। आयोग ने कुमार के इस्तीफे की अफवाहों को गलत बताया। आयोग ने स्पष्ट किया कि तीन सदस्यीय निकाय के भीतर सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं और आंतरिक मतभेद के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

























