समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने यह घोषणा की है कि उनकी पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक अपना विरोध जारी रखेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विरोध प्रदर्शन सड़कों से लेकर संसद तक किया जाएगा।
6 अक्टूबर 2026 को आनंद भदौरिया ने राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के एक विरोध मार्च में हिस्सा लिया। यह मार्च संसद के मकर द्वार से शुरू होकर भारतीय चुनाव आयोग के मुख्यालय तक गया, जहाँ मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की गई।
यह पूरा विवाद तब गहरा गया जब 23 सितंबर 2026 को कुछ रिपोर्ट सामने आईं। इन रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों के दौरान प्रक्रियात्मक बदलावों और वोटर लिस्ट में संशोधन को लेकर 14 लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
चुनाव आयोग के नियमों और कानूनी विवाद
24 सितंबर 2026 तक फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को लेकर विवाद और बढ़ गया। साथी चुनाव आयुक्तों का तर्क था कि चुनाव आयोग के पास कानून मंत्रालय की मंजूरी के बिना इस तरह के बदलाव लागू करने का अधिकार नहीं है।
इस मामले में कानूनी दबाव भी काफी बढ़ गया है। 25 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई। इस याचिका में ज्ञानेश कुमार, मनीष गर्ग और सीमा खन्ना के खिलाफ ड्यूटी में लापरवाही के आरोप लगाते हुए मुकदमा चलाने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट और महाभियोग की कार्रवाई
5 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने के लिए अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है, हालांकि अन्य चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
उसी दिन पूर्व नौकरशाहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस और चार्जशीट सौंपी। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 324(5) का हवाला देते हुए ‘साबित कदाचार या अक्षमता’ का आरोप लगाया है।
पुराने केस की जांच और विपक्षी दलों के आरोप
केरल सरकार ने भी ज्ञानेश कुमार से जुड़े 20 साल पुराने एक मामले की जांच की सिफारिश की है। सरकार का दावा है कि उनकी कानूनी छूट 2006 के उन कार्यों पर लागू नहीं होती जो आधिकारिक नहीं थे।
इस पूरे मामले पर चुनाव आयोग का कहना है कि लागू किए गए सभी फैसलों पर तीनों आयुक्तों के हस्ताक्षर हैं। दूसरी ओर, विपक्षी दलों का यह आरोप है कि कुमार ने अपने सहयोगियों की असहमति को दरकिनार कर दिया।
आनंद भदौरिया ने एक बार फिर दोहराया कि अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी अपनी मांगों के पूरा होने तक INDIA गठबंधन के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।

























