मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज के सांसद अखिलेश यादव ने INDIA विपक्षी गठबंधन के अन्य सदस्यों के साथ एक विरोध मार्च निकाला। यह मार्च संसद भवन से शुरू होकर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के मुख्यालय तक गया।
इस प्रदर्शन में विपक्षी गठबंधन के लगभग 150 से 250 सांसद शामिल हुए। इसमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, शरद पवार, प्रियंका गांधी वाड्रा और अभिषेक बनर्जी जैसे प्रमुख नेता भी मौजूद थे।
विपक्षी नेताओं ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और वोटर लिस्ट में हेरफेर का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि फॉर्म-7 का इस्तेमाल करके पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों (PDA) के वोटरों को लिस्ट से हटाने की साजिश रची जा रही है।
चुनाव आयोग से इस्तीफे और पारदर्शिता की मांग
प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की। विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। साथ ही उन्होंने वर्तमान SIR प्रक्रिया को तुरंत रद्द करने और चुनावी प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता लाने की मांग की है।
मार्च के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले भी फूंके। इन पुतलों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की वर्दी पहनाई गई थी।
अखिलेश यादव के गंभीर आरोप और दावे
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए एक ‘इलेक्शन मशीन’ की तरह काम कर रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए सुझाव दिया कि आयोग को अपनी बिल्डिंग पर BJP का झंडा लगा देना चाहिए।
अपने दावों के समर्थन में यादव ने उत्तर प्रदेश की उपचुनावों में धांधली का जिक्र किया। उन्होंने विशेष रूप से कुंदरकी, मीरापुर, अयोध्या और अंबेडकर नगर की घटनाओं के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की घटनाओं का हवाला दिया।
इसके अलावा उन्होंने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के प्रस्ताव की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह रणनीति एक ही बार चुनावी हेरफेर करके पांच साल तक सत्ता हासिल करने के लिए बनाई गई है।
पुलिस की कार्रवाई और आयोग का जवाब
दिल्ली पुलिस ने इस मार्च को रोकने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और कई परतों में बैरिकेडिंग की थी। पुलिस ने सांसदों को ट्रांसपोर्ट भवन पर ही रोक दिया और चेतावनी दी कि आगे NITI आयोग के पास उन्हें और अधिक रोका जाएगा।
पुलिस के हस्तक्षेप के बाद विपक्षी सांसदों ने सड़क पर ही बैठकर प्रदर्शन किया। चुनाव आयोग ने पक्षपात के सभी आरोपों को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि उसके तीन सदस्यीय निकाय द्वारा लिए गए सभी निर्णय आम सहमति से लिए जाते हैं।
यह प्रदर्शन अखिलेश यादव द्वारा उठाए गए शिकायतों की एक श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पहले उन्होंने अगस्त 2025 में चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च किया था और फरवरी व सितंबर 2026 में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे।

























