बारिश ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी, खेतों में बिछी धान की फसल!
रिपोर्ट:- विवेक शुक्ला
रामनगर, बाराबंकी। लगातार दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेती के सहारे परिवार की जीविका चलाने वाले किसानों की महीनों की मेहनत और गाढ़ी कमाई पर बारिश कहर बनकर टूटी है। खेतों में पककर तैयार होने के कगार पर पहुंच चुकी धान की फसल तेज हवाओं के चलते जमीन पर बिछ गई। कई खेतों में पानी भर जाने से फसलों के सड़ने और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। नुकसान देखकर किसान अपनी किस्मत को कोसने को मजबूर हैं।गुरुवार दोपहर से तेज हवाओं के साथ शुरू हुई बारिश लगातार जारी रहने से तहसील क्षेत्र के ग्राम नचना, बरुआ, त्रिलोकपुर, बिछलखा, सीहामऊ, तपेसिपाह, लहड़रा समेत आसपास के गांवों में खेत जलमग्न हो गए। सबसे अधिक नुकसान धान की फसल को बताया जा रहा है। किसानों ने बताया कि धान की फसल लगभग पककर तैयार होने वाली थी। कुछ ही समय बाद इसकी कटाई शुरू होनी थी, लेकिन बारिश और तेज हवा ने तैयार फसल को खेतों में गिरा दिया। जमीन पर गिरी फसल में पानी भरने से दाने खराब होने और पैदावार में कमी आने की चिंता किसानों को सताने लगी है।
किसानों का कहना है कि धान की फसल तैयार करने में बीज, खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी पर बड़ी रकम खर्च होती है। पूरे सीजन की मेहनत के बाद जब फसल घर आने का समय आया तो बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। छोटे और सीमांत किसान सबसे अधिक परेशान हैं, क्योंकि खेती की कमाई से ही उनके परिवार का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरतें पूरी होती हैं।धान के अलावा गन्ने और मक्का की फसल को भी तेज हवाओं और बारिश से नुकसान पहुंचा है। खेतों में खीरा समेत विभिन्न सब्जियों की फसलें भी प्रभावित हुई हैं। लगातार बारिश के कारण सब्जियों के खेतों में पानी भरने से पौधों के खराब होने की आशंका है। वहीं, कई स्थानों पर तेज हवाओं के चलते हरे-भरे पेड़ भी धराशायी हो गए।अचानक हुए इस नुकसान से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने की चिंता है।

























