जनसूचना (RTI) मांगी तो लेखपाल ने दर्ज करा दिया अवैध कब्जे का मुकदमा! 2 बार ‘क्लीन चिट’ मिलने के बाद भी पीड़ित पर धारा 67 की कार्रवाई !
रिपोर्ट:- अश्वनी कुमार
सिरौली गौसपुर के पंचायत चौखड़ी में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना और सरकारी कामकाज का हिसाब मांगना एक ग्रामीण गनेस कुमार पुत्र सुंदर लाल वर्मा को बेहद भारी पड़ गया है। मामला राजस्व विभाग के लेखपाल और गांव के ही कुछ रंजिश रखने वाले लोगों के कथित गठजोड़ का है, जहां सूचना का अधिकार (RTI) कानून का इस्तेमाल करने पर एक पीड़ित परिवार को ही भू-माफिया साबित करने की कोशिश की जा रही है।पीड़ित का आरोप है कि गांव की गाटा संख्या 391 (तालाब की भूमि) पर 0.0055 हेक्टेयर क्षेत्रफल में टीन शेड रखकर अवैध कब्जा करने का झूठा आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत दंडात्मक कार्यवाही शुरू कर दी गई है। जबकि, सच्चाई इससे कोसों दूर है।क्या है पूरा मामला?पीड़ित के मुताबिक, उनका तालाब की भूमि (गाटा संख्या 391) पर न तो पूर्व में कभी कोई कब्जा था और न ही वर्तमान में कोई अतिक्रमण है। पीड़ित परिवार अपनी पुश्तैनी आबादी भूमि गाटा संख्या 402 (प्रपत्र 10 के अनुसार) पर निवास करता है, जो उनके पूर्वजों के समय से उनके वैध कब्जे में है।विवाद की शुरुआत तब हुई जब पीड़ित ने दिनांक 16 अक्टूबर 2025 को क्षेत्र की लेखपाल संध्या मौर्या से संबंधित कुछ विभागीय बिंदुओं और सरकारी कामकाज पर जनसूचना (RTI) के तहत जवाब मांग लिया। आरोप है कि अपनी कमियां उजागर होने के डर से बौखलाईं लेखपाल संध्या मौर्या ने पीड़ित से व्यक्तिगत रंजिश मान ली। लेखपाल ने गांव के ही एक पुराने विपक्षी (जिससे पीड़ित की पहले से रंजिश चल रही थी) के साथ साठगांठ की और पीड़ित को फंसाने के लिए तालाब पर अवैध कब्जे की मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार कर धारा 67 की कार्रवाई ठोक दी।पहले मिल चुकी है दो-दो बार ‘क्लीन चिट’इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि गांव के कुछ रंजिशी तत्वों ने पहले भी पीड़ित के खिलाफ तालाब पर कब्जे की शिकायतें दर्ज कराई थीं। लेकिन उस समय तैनात रहे पूर्व लेखपालों ने मौके की निष्पक्ष जांच की थी और एक नहीं, बल्कि दो-दो बार पीड़ित को विभागीय ‘क्लीन चिट’ दी थी। पूर्व की जांच रिपोर्टों में स्पष्ट कहा गया था कि पीड़ित द्वारा तालाब की भूमि पर कोई कब्जा नहीं किया गया है।लेकिन जैसे ही पीड़ित ने 16-10-25 को आरटीआई (RTI) डाली, अचानक पुराने सारे नियम-कायदे बदल गए। नई लेखपाल ने पूर्व की सभी जांचों को दरकिनार करते हुए विपक्षी के इशारे पर गलत और एकतरफा कार्यवाही को अंजाम दे दिया।आरटीआई में भी गुमराह करने का आरोपपीड़ित ने यह भी संगीन आरोप लगाया है कि उनके द्वारा मांगी गई जनसूचना के जवाब में भी उन्हें पूरी तरह गुमराह किया गया और भ्रामक व अधूरे तथ्य उपलब्ध कराए गए, ताकि विभाग की कमियों को छुपाया जा सके।
इस सम्बन्ध में संबंधित लेखपाल संध्या से पक्ष जाना गया तो उन्होंने कहा कि सारे आरोप प्रत्यारोप गलत है और पूर्व में गनेश का कोई कब्जा नहीं था लेकिन वर्तमान में कब्जा जांच के दौरान पाया गया !



























