मध्य प्रदेश के शिवपुरी में ‘श्री राम कथा’ के दौरान भगवान कृष्ण की शारीरिक बनावट पर धीरेंद्र शास्त्री की विवादित टिप्पणी के बाद मथुरा के वृंदावन में संत समुदाय दो हिस्सों में बंट गया है। शास्त्री ने भगवान कृष्ण को ‘टेढ़ा’ बताया था, जिसके बाद स्थानीय धार्मिक नेताओं के बीच सार्वजनिक टकराव शुरू हो गया है।
5 नवंबर, 2026 को श्री राधा कांत मंदिर में एक बैठक हुई, जिसमें आंतरिक तनाव साफ नजर आया। इस दौरान चतुर्थ संप्रदाय के महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने कुछ संतों पर अवसरवाद का आरोप लगाया और कहा कि कुछ लोग पैसों के लिफाफे मिलने पर समर्थन या विरोध करते हैं। नंदगांव के सेवायत हरिमोहन गोस्वामी ने भी वित्तीय लाभ के इन आरोपों को दोहराया, जिससे सभा में काफी तनाव बढ़ गया।
संतों के अलग-अलग दावे और विरोध
महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज, अखाड़ा परिषद वृंदावन के अध्यक्ष महंत हरिशंकर दास नागा और धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौर ने शास्त्री का बचाव किया है। उनका तर्क है कि उनकी टिप्पणियां रसिक संतों द्वारा वर्णित ऐतिहासिक ‘त्रिभंगी’ मुद्रा के अनुरूप हैं। महंत हरिशंकर दास नागा ने उन संतों के प्रति नाराजगी जताई जो इस विवाद के बावजूद शास्त्री के साथ फोटो खिंचवाने की कोशिश कर रहे हैं।
दूसरी ओर, ऑल इंडिया तीर्थ पुरोहित महासभा के संरक्षक महेश पाठक ने इन बयानों को ‘अश्लील’ और ‘अक्षम्य’ बताते हुए इनकी निंदा की है। उन्होंने चेतावनी दी कि इन टिप्पणियों को एक साधारण गलती मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। शिवपुरी के उस प्रवचन का वीडियो वायरल होने के कारण मथुरा और वृंदावन के आध्यात्मिक नेताओं के बीच यह विभाजन जारी है।









