उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में संगठित धर्म परिवर्तन और शोषण की गतिविधियों का खुलासा करते हुए राज्य सरकार को एक विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपी है। दस महीने की जांच के बाद तैयार की गई यह रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर 25 अक्टूबर, 2026 को पेश की गई।
जांच में पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, रेडियोलॉजी और गांधी वार्ड सहित कई विभागों में व्यापक कदाचार पाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, मेडिकल स्टाफ और सीनियर डॉक्टरों सहित लगभग 13 लोग यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और महिला कर्मचारियों के उत्पीड़न में शामिल थे।
अधिकारियों की लापरवाही और धर्म परिवर्तन के आरोप
रिपोर्ट में नर्सिंग स्टाफ के सदस्य नफीस और फुरकान के साथ-साथ डॉ. रिज़वान के नाम का विशेष उल्लेख किया गया है। आरोप है कि पीड़ितों को रोमांटिक रिश्तों और शादी के वादों के जरिए निशाना बनाया गया और बाद में धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया।
STF ने KGMU प्रशासन पर जानबूझकर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। जांचकर्ताओं ने पाया कि यूनिवर्सिटी अधिकारियों को कई शिकायतों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के बजाय सबूतों को दबाया या आरोपियों को संरक्षण दिया। यह पूरी जांच दिसंबर 2025 में डॉ. रमीज़ और अन्य लोगों से जुड़े कदाचार की खबरों के बाद शुरू हुई थी।
सरकार का कड़ा रुख और आगामी कार्रवाई
इन खुलासों के बाद राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 30 अक्टूबर, 2026 को KGMU रजिस्ट्रार को एक औपचारिक निर्देश जारी किया। इसमें सभी चिन्हित स्टाफ और अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं और सरकार ने अनुपालन रिपोर्ट जमा करने को कहा है।
इन निर्देशों के अनुसार, KGMU प्रशासन ने दावों की जांच के लिए एक आंतरिक समिति बनाने का निर्णय लिया है। इस संकट से निपटने के लिए 6 नवंबर, 2026 को एक उच्च स्तरीय बैठक निर्धारित की गई है।









