समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वरिष्ठ नेता अज़म खान के खिलाफ जारी कानूनी कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इस पूरी स्थिति को राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा निरंतर अन्याय करार दिया है।
अखिलेश यादव ने यह बयान वरिष्ठ नेता के खिलाफ हालिया घटनाक्रमों के बाद दिया है। 31 अक्टूबर 2026 को रामपुर जेल से रिहा होने के तुरंत बाद मनी लॉन्ड्रिंग मामले में Enforcement Directorate (ED) ने अज़म खान को हिरासत में ले लिया था।
जौहर ट्रस्ट मामले में कानूनी कार्रवाई
इसके बाद 1 नवंबर 2026 को गाजियाबाद की एक विशेष PMLA कोर्ट ने खान को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जिसके बाद उन्हें दसना जेल स्थानांतरित कर दिया गया। यह कानूनी प्रक्रिया जौहर ट्रस्ट में कथित अनियमितताओं पर केंद्रित है।
28 अक्टूबर 2026 को ED ने जौहर यूनिवर्सिटी की कई करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की थीं। ED का आरोप है कि यूनिवर्सिटी निर्माण के लिए सरकारी फंड का डायवर्जन किया गया और ट्रस्ट को गैर-genuine स्रोतों से दान मिला।
राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप
अखिलेश यादव ने 22 अक्टूबर 2026 को रामपुर जेल में अज़म खान से मुलाकात की थी। उन्होंने बार-बार आरोप लगाया है कि भाजपा के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार राजनीतिक प्रतिशोध का अभियान चला रही है। उनका कहना है कि किसी अन्य राजनीतिक परिवार को इतने सारे मनगढ़ंत मामलों का सामना नहीं करना पड़ा।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अब्बास हजरत ने भी इस बात का समर्थन करते हुए दावा किया कि सरकार नए मामलों में फंसाकर खान को जेल में रखने पर तुली है।
दूसरी ओर, मुख्तार अब्बास नकवी समेत सरकारी प्रतिनिधियों और भाजपा नेताओं का कहना है कि खान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई केवल भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के पुख्ता सबूतों पर आधारित है और इसमें कोई राजनीतिक पूर्वाग्रह नहीं है।









