लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में 12 डॉक्टरों और स्टाफ सदस्यों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। यह कदम उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा की गई एक विस्तृत जांच के बाद उठाया गया है।
10 महीने तक चली इस जांच में संस्थान के भीतर यौन शोषण, मानसिक उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। 30 अक्टूबर 2026 को राज्य चिकित्सा शिक्षा विभाग ने KGMU रजिस्ट्रार को औपचारिक निर्देश जारी कर STF रिपोर्ट में नामजद लोगों के खिलाफ प्रशासनिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया।
कार्यवाही के लिए आपातकालीन बैठक और विभाग
KGMU की कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने उचित प्रशासनिक कार्यवाही तय करने के लिए 6 नवंबर 2026 को विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाई है। इन आरोपों में पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और रेडियोलॉजी विभागों के साथ-साथ गांधी वार्ड में तैनात कर्मी शामिल हैं।
रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभाग के एक रेजिडेंट डॉक्टर के मामले का जिक्र है, जिसे जनवरी 2026 में इसी तरह के कदाचार के लिए गिरफ्तार किया गया था। जांचकर्ताओं ने वरिष्ठ संकायों और प्रशासनिक कर्मचारियों द्वारा शिकायतों को दबाने और आरोपियों को बचाने की भूमिका पर भी प्रकाश डाला है।
- विश्वविद्यालय प्रशासन को KGMU अधिनियम 2002 और KGMU संविधि 2011 के तहत कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया गया है।
- अनुशासनात्मक प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने के लिए विभागीय जांच समितियां गठित की जाएंगी।
- राज्य सरकार को एक विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट सौंपी जाएगी।









