All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) के अध्यक्ष Asaduddin Owaisi ने एक राजनीतिक संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi को ‘रावण’ कहने के संभावित परिणामों पर अपनी बात रखी।
Owaisi ने अपने श्रोताओं से एक सवाल पूछते हुए जानना चाहा कि क्या वे प्रधानमंत्री को ‘रावण’ कहेंगे। इसके बाद उन्होंने दावा किया कि ऐसा करने पर तुरंत प्रशासनिक कार्रवाई होगी।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में रिवरफ्रंट या हाईवे प्रोजेक्ट्स से जुड़ी पुरानी फाइलें फिर से खोल दी जाएंगी। Owaisi ने इस बात पर जोर दिया कि उनके राजनीतिक विरोधी अक्सर यह सवाल करते हैं कि उनके खिलाफ कोई कानूनी या आधिकारिक कार्रवाई क्यों नहीं की जाती।
जांच और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर तर्क
Owaisi का तर्क था कि उनके और अन्य नेताओं के साथ व्यवहार में अंतर इसलिए है क्योंकि उन्होंने रिवरफ्रंट या एक्सप्रेसवे जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स नहीं बनाए हैं। उनका मानना है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स बनाने वाले नेता जांच के दायरे में आने के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के न होने के कारण ही वे जांच एजेंसियों की उन कार्रवाइयों से बचे हुए हैं, जो अक्सर राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल की जाती हैं।
पीएम मोदी और रावण शब्द पर पुराना विवाद
यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब प्रधानमंत्री Modi के लिए ‘रावण’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस तेज थी। यह विवाद साल 2022 के नवंबर और दिसंबर के अंत में चरम पर पहुंचा था।
यह विवाद विशेष रूप से गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान बढ़ा था। उस समय Congress के अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने भी इसी तरह की टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद Bharatiya Janata Party (BJP) के कई नेताओं ने कड़ी आलोचना की थी।
- केंद्रीय मंत्री Giriraj Singh सहित कई बीजेपी नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई थी।
- उनका तर्क था कि प्रधानमंत्री के पद के लिए ऐसी भाषा का उपयोग करना पूरी तरह से अनुचित है।
Asaduddin Owaisi की ये टिप्पणियां राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कानूनी दबाव के कथित चयनात्मक इस्तेमाल पर एक कटाक्ष हैं।









