अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट सियांग जिले के पासीघाट में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट के सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुए हैं। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया और सुरक्षाकर्मियों को घायल कर दिया।
हालात को काबू में करने के लिए भारत सरकार ने इस क्षेत्र में रैपिड एक्शन फोर्स के 250 जवानों को तैनात किया है। यह कदम तब उठाया गया जब प्रदर्शन उग्र हो गए और सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक 23 अक्टूबर 2026 की रात और 24 अक्टूबर की सुबह तक प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस स्टेशन और नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन के कार्यालय में आग लगा दी। इस हिंसा के दौरान पुलिस की गाड़ियों को भी काफी नुकसान पहुंचा है।
पत्थरबाजी में सुरक्षाकर्मी घायल और नेताओं के घर vandalised
अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों द्वारा की गई पत्थरबाजी में 40 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी घायल हो गए हैं। यह स्थिति तब बिगड़ी जब कई स्थानीय समूहों ने 12 घंटे का बंद बुलाया था।
इस बंद को बुलाने वाले समूहों में आदि बाने केबांग यूनाइटेड, SUMP अफेक्टेड एरिया यूथ एसोसिएशन, सियांग इंडीजीनस फार्मर्स फोरम यूथ विंग और आदि गालो वेलफेयर सोसाइटी शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय राजनीतिक नेताओं के घरों को खास तौर पर निशाना बनाया।
- बीजेपी राज्य अध्यक्ष कलिंग मोयोंग का घर
- विधायक ओनी पान्यांग का घर
- विधायक निनोंग एरिंग का घर
उपरोक्त सभी नेताओं के घरों में तोड़फोड़ की गई। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इस बड़े बांध प्रोजेक्ट के खिलाफ था।
चीन की चुनौती और प्रोजेक्ट के तकनीकी कारण
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और उपमुख्यमंत्री चोवना मेन ने इस प्रोजेक्ट को चीन की गतिविधियों के जवाब में बेहद जरूरी बताया है। चीन ने जुलाई 2025 तक तिब्बत में यारलुंग सांगपो नदी पर 60,000 मेगावाट के मेडोग हाइड्रोपावर कॉम्प्लेक्स का निर्माण शुरू कर दिया है।
प्रोजेक्ट का समर्थन करने वालों का दावा है कि भारतीय पक्ष पर एक बड़ा जलाशय बनाने से पानी के बहाव को नियंत्रित किया जा सकेगा। इस जलाशय में लगभग 9.2 बिलियन क्यूबिक मीटर लाइव स्टोरेज होगा।
इस डिजाइन का मुख्य उद्देश्य सियांग ब्रह्मपुत्र बेसिन में आने वाली बाढ़ को कम करना है। साथ ही यह ऊपरी हिस्से से अचानक पानी छोड़े जाने के जोखिम को भी कम करेगा।
स्थानीय लोगों की चिंताएं और सरकार का आश्वासन
सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट अभी प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट के चरण में है और इसे निर्माण की अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। सरकारी प्रतिनिधियों ने कहा है कि यदि सर्वे में यह पाया गया कि बांध सिस्मिक ज़ोन V में व्यवहार्य नहीं है, तो यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी।
दूसरी तरफ आलोचकों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट स्वदेशी भूमि और पूर्वजों के क्षेत्रों के लिए खतरा है। स्थानीय आदि समुदाय के संगठन इस नदी को ‘आने सियांग’ या ‘मां सियांग’ मानते हैं। उन्हें डर है कि इस सुविधा के कारण कई गांवों के निवासियों को बड़े पैमाने पर विस्थापित होना पड़ेगा।
प्रशासनिक कार्रवाई और भविष्य की स्थिति
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 24 अक्टूबर को एक बयान जारी कर हिंसा की कड़ी निंदा की। उन्होंने स्थानीय युवा समूहों को बातचीत में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया और प्रशासनिक प्रक्रिया की निगरानी के लिए पूरा महीना सियांग क्षेत्र में बिताने का वादा किया।
सुरक्षा व्यवस्था को बहाल करने के लिए 25 अक्टूबर तक रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को नवी मुंबई से हवाई मार्ग से इस क्षेत्र में लाया गया। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर पासीघाट, मेबो और रुकसिन शहरों में भीड़ इकट्ठा करने पर सख्त पाबंदी लगा दी है।
प्रोजेक्ट की आगे की प्रगति अब प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट के पूरा होने पर निर्भर करती है। जहां योजनाकार ऊर्जा लाभ और रोजगार की संभावना बता रहे हैं, वहीं निवासी सुरक्षा बलों की वापसी और घाटी में सभी सर्वे गतिविधियों को तुरंत बंद करने की मांग कर रहे हैं।









