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प्रोफेसर अशोक सेन बने भौतिकी में ऑस्कर क्लेन मेडल जीतने वाले पहले भारतीय

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Naradsamvad - Narad news Agency
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प्रोफेसर अशोक सेन को साल 2026 के ऑस्कर क्लेन मेडल से सम्मानित किया गया है। वह यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान पाने वाले पहले भारतीय भौतिक विज्ञानी बन गए हैं।

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बेंगलुरु स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल साइंसेज ने 24 अक्टूबर 2026 को इस खबर की पुष्टि की। संस्थान ने स्ट्रिंग थ्योरी की वैश्विक समझ में उनके योगदान को रेखांकित किया है।

इस सम्मान ने बेंगलुरु के स्ट्रिंग थ्योरिस्ट अशोक सेन को दुनिया के उन चुनिंदा वैज्ञानिकों के समूह में शामिल कर दिया है जिन्होंने पहले यह मेडल जीता है। इस समूह में स्टीफन हॉकिंग और पीटर हिग्स जैसे नाम शामिल हैं, साथ ही कई ऐसे नोबेल पुरस्कार विजेता भी हैं जिन्होंने आधुनिक भौतिकी को एक नया आकार दिया है।

स्टॉकहोम में मेडल चयन और विशेष व्याख्यान

इस मेडल के चयन की पूरी प्रक्रिया का प्रबंधन स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी और रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज की नोबेल कमेटी फॉर फिजिक्स द्वारा किया जाता है। इस विशेष मेडल की स्थापना साल 1988 में की गई थी।

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परंपरा के अनुसार, मेडल प्राप्त करने वाले व्यक्ति को एक व्याख्यान देना होता है। इसी क्रम में अशोक सेन ने 22 अक्टूबर 2026 को स्टॉकहोम के अल्बानोवा सेंटर में ‘ग्रेविटी फ्रॉम स्ट्रिंग्स एंड स्ट्रिंग्स फ्रॉम ग्रेविटी’ शीर्षक से ऑस्कर क्लेन मेमोरियल लेक्चर दिया।

अशोक सेन का शैक्षणिक सफर और उपलब्धियां

सैद्धांतिक भौतिकी के क्षेत्र में अशोक सेन का करियर लंबे समय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उनका जन्म 15 जुलाई 1956 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने साल 1975 में प्रेसीडेंसी कॉलेज से अमल कुमार रायचौधुरी के मार्गदर्शन में अपनी बीएससी पूरी की।

उनकी शैक्षणिक यात्रा आगे बढ़ी और उन्होंने 1978 में आईआईटी कानपुर से एमएससी की डिग्री हासिल की। इसके बाद साल 1982 में उन्होंने स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी से पीएचडी पूरी की।

फर्मिलैब और एसएलएसी में पोस्टडॉक्टोरल काम पूरा करने के बाद वह 1988 में भारत लौटे और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च से जुड़ गए। अपने करियर के दौरान उन्हें कई बड़े सम्मान मिले, जिनमें शामिल हैं:

  • साल 1994 में शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार
  • साल 2001 में पद्म श्री
  • साल 2012 में फंडामेंटल फिजिक्स में ब्रेकथ्रू प्राइज
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साल 1998 में उन्हें रॉयल सोसाइटी का फेलो चुना गया था। इस चयन की प्रक्रिया स्टीफन हॉकिंग द्वारा दिए गए नामांकन से शुरू हुई थी।

वैज्ञानिक खोजें और वैश्विक प्रभाव

अशोक सेन ने कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोजों के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। उन्होंने एस-डुअलिटी पर काम किया, जिससे यह साबित हुआ कि पांच अलग-अलग स्ट्रिंग थ्योरी असल में एक ही बुनियादी थ्योरी की अलग-अलग सीमाएं हैं।

इसके अलावा उन्होंने एक्सट्रीमल ब्लैक होल्स के लिए एंट्रॉपी फंक्शन फॉर्मलिज्म विकसित किया। उन्होंने अनस्टेबल डी-ब्रेन के अध्ययन में भी काफी महत्वपूर्ण प्रगति की है।

वैज्ञानिक समुदाय और संस्थान की प्रतिक्रिया

इस पुरस्कार ने इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल साइंसेज जैसे संस्थानों से निकलने वाले शोध की गुणवत्ता की ओर सबका ध्यान खींचा है। केंद्र के निदेशक राजेश गोपाकुमार ने अपने सहयोगी की इस उपलब्धि पर गर्व जताया है।

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राजेश गोपाकुमार ने कहा कि अशोक का उनके साथ होना और उत्कृष्टता का मानक स्थापित करना बहुत शानदार रहा है। प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर के कार्यालय ने भी उन्हें बधाई संदेश भेजा और आधुनिक स्ट्रिंग थ्योरी को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका की सराहना की।

यह पुरस्कार भारतीय वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह उन युवा शोधकर्ताओं के लिए गर्व का विषय है जो भारत के भीतर ही विश्व स्तरीय उत्कृष्टता के उदाहरण तलाशते हैं।

उनका भविष्य का काम बेंगलुरु स्थित इसी संस्थान में जारी रहेगा। उनके शोध प्रोजेक्ट्स से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए लोग इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल साइंसेज की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रख सकते हैं। इस मान्यता से आने वाले वर्षों में उच्च स्तरीय वैश्विक सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है।

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