भारत ने आधिकारिक तौर पर गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के 300 GW के आंकड़े को पार कर लिया है। हालांकि, देश के सामने अब अधिक अक्षय ऊर्जा को जोड़ने के लिए ग्रिड अपग्रेड और बैटरी स्टोरेज के विस्तार की तत्काल आवश्यकता है।
Renewable Energy India Expo में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि 2030 तक 500 GW के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए बुनियादी ढांचे की इन कमियों को दूर करना होगा। ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और कोयले पर निर्भरता कम करने के लिए वेरिएबल रिन्यूएबल एनर्जी का विश्वसनीय एकीकरण जरूरी है।
Livemint, OilPrice, ET Energyworld और JMK Research की रिपोर्टों ने क्षमता और कटौती के आंकड़ों की पुष्टि की है। ये निष्कर्ष बिजली क्षेत्र के सामने मौजूद चुनौतियों के बड़े पैमाने को दर्शाते हैं।
ग्रिड की सीमाओं का बिजली वितरण पर असर
ग्रिड की सीमाओं के कारण केवल सितंबर महीने में ही लगभग 118.6 GW अक्षय ऊर्जा क्षमता की कटौती करनी पड़ी। उत्पादित बिजली की यह बर्बादी भविष्य में क्षमता विस्तार की गति को धीमा कर सकती है।
Ministry of New and Renewable Energy और बिजली मंत्रालय के अधिकारी इस नुकसान का सक्रिय रूप से मूल्यांकन कर रहे हैं। उनका उद्देश्य इस क्षेत्र में आने वाले ठहराव को रोकना है।
हालिया आंकड़ों के अनुसार बैटरी क्षमता बढ़कर लगभग 10 GWh हो गई है। इसके बावजूद, ऊर्जा भंडारण और ट्रांसमिशन कंपनियों पर अब तेजी से विस्तार करने का दबाव है।
वर्तमान में कटौती के कारण होने वाले नुकसान का बोझ उन डेवलपर्स को उठाना पड़ रहा है जो इन अक्षमताओं का सामना कर रहे हैं। जैसे-जैसे स्टोरेज समाधान मुख्यधारा बनेंगे, जीवाश्म ईंधन ऑपरेटरों की बाजार स्थिति में लंबी अवधि में गिरावट आ सकती है।
ऊर्जा के अगले चरण के लिए रणनीतियां
Center for Science, Technology and Policy और Ministry of New and Renewable Energy के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि स्टोरेज और ग्रिड लचीलापन राष्ट्रीय ऊर्जा नीति का अगला महत्वपूर्ण चरण है। Grid-India से लेकर स्थानीय वितरण कंपनियों तक सभी हितधारकों पर खुद को ढालने का भारी दबाव है।
यदि ये प्रणालीगत सुधार सफल होते हैं, तो उपभोक्ताओं को स्वच्छ बिजली का लाभ मिलेगा। इन अपग्रेड के लिए निवेश की आवश्यकता दस लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
नीति निर्माताओं ने संकेत दिया है कि एक नई नीति लागू होगी जो सभी नई अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए स्टोरेज अनिवार्य करेगी। यह नियम 2027 से प्रभावी होगा।
- इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में क्षमता बढ़ने से मौजूदा ग्रिड बुनियादी ढांचे पर अत्यधिक दबाव न पड़े।
- सरकार अपने 2030 के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है।
- सोलर और विंड फार्म का तेजी से विकास जारी रखना एजेंडे में शामिल है।









