Skip to main content

Naradsamvad

उत्तराखंड के युवक ने बनाया अपना इलेक्ट्रिक विमान, 13 साल की मेहनत के बाद पहली बार भरी उड़ान

Naradsamvad
Naradsamvad - Narad news Agency
5 Min Read

उत्तराखंड के एक 21 वर्षीय बीए स्नातक युवक ने खुद के बनाए एक इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण किया है। इस युवक का नाम रवि तम्टा है, जिन्होंने पिछले 13 वर्षों तक स्वतंत्र अध्ययन और स्थानीय प्रयोगों के जरिए इस विमान को विकसित किया है।

Ad image

रवि तम्टा ने इस प्रोजेक्ट को अल्मोड़ा की पहाड़ियों में यात्रा की कठिन परिस्थितियों को सुधारने के लिए बनाया है। 21 से 24 अक्टूबर 2026 के बीच Moneycontrol, News18 और The Better India जैसे माध्यमों से आई रिपोर्ट्स में यह पुष्टि की गई है कि इस प्रोजेक्ट के लिए उन्होंने किसी औपचारिक इंजीनियरिंग ट्रेनिंग के बजाय खुद से पढ़ाई की मदद ली।

काफलिखान गांव के रहने वाले रवि तम्टा ने मल्टीरोटर ड्रोन के सिद्धांतों का उपयोग करके इस विमान का निर्माण किया। इस पूरे प्रयास में उनके पिता हरीश राम ने उनका पूरा सहयोग किया, क्योंकि परिवार ने पारंपरिक संस्थागत रास्तों के बजाय अपनी मेहनत पर भरोसा किया।

HAPIDA SKYNeX की खासियतें और लक्ष्य

रवि तम्टा द्वारा बनाए गए इस विमान का नाम HAPIDA SKYNeX है। यह एक सिंगल-सीटर विमान है जो पूरी तरह से बैटरी से चलता है। इसमें एक हल्का फ्रेम और एक पारदर्शी कैनोपी लगाई गई है।

ALSO READ  Apple ने भारत में लॉन्च किया अपना पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन iPhone Duo, जानें कीमत और फीचर्स

इस विमान में कई इलेक्ट्रिक मोटर और प्रोपेलर का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी वजह से इसे उड़ने के लिए किसी रनवे की जरूरत नहीं पड़ती और यह सीधे ऊपर की ओर उड़ सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य दूरदराज के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए परिवहन का एक तेज विकल्प उपलब्ध कराना है।

वर्तमान में पहाड़ों में 40 किलोमीटर की दूरी तय करने में सड़क मार्ग से करीब 90 मिनट का समय लगता है। HAPIDA SKYNeX की मदद से इस यात्रा को सैद्धांतिक रूप से केवल 15 मिनट में पूरा किया जा सकता है।

उड़ान परीक्षण और वर्तमान स्थिति

अगस्त 2026 के दौरान इस प्रोटोटाइप का अल्मोड़ा में एक छोटा परीक्षण किया गया। इस दौरान विमान एक खुले क्षेत्र में करीब एक मिनट तक हवा में रहा, जिसमें एक आर्मी हेलीपैड भी शामिल था।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उड़ान का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिससे इस प्रोजेक्ट को काफी चर्चा मिली। हालांकि, SKYNeX जैसे प्रायोगिक प्रोटोटाइप के पास अभी तक उन प्रमाणित प्रदर्शन आंकड़ों की कमी है जो परिपक्व एयरोस्पेस उत्पादों में होते हैं।

ALSO READ  फतेहपुर में सड़क हादसा: ड्यूटी पर तैनात ARTO कांस्टेबल की कंटेनर से टक्कर के बाद मौत, ड्राइवर गिरफ्तार

कंपनी की वेबसाइट पर स्पष्ट रूप से बताया गया है कि अभी तक इसकी रेंज, बैटरी क्षमता, मोटर पावर, एंड्योरेंस और सटीक पेलोड जैसे सत्यापित स्पेसिफिकेशन तय नहीं किए गए हैं। इसके स्ट्रक्चरल लोड और फेल्योर मोड की कोई स्वतंत्र ऑडिटिंग भी नहीं हुई है, इसलिए यह प्रोजेक्ट अभी विकास के शुरुआती चरण में है।

प्रमाणन की चुनौतियां और नियामक नियम

एक प्रोटोटाइप से प्रमाणित विमान बनने तक का सफर काफी कठिन होता है। इंसानों को सुरक्षित ले जाने के लिए मल्टीरोटर सिस्टम को बड़ा करना पड़ता है, जिसमें थर्मल मैनेजमेंट, कंट्रोल रिडंडेंसी और एनर्जी डेंसिटी जैसी जटिल चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, पहाड़ी इलाकों में हवा, लैंडिंग साइट की उपलब्धता और खराब मौसम का बड़ा जोखिम रहता है।

वर्तमान में इस वाहन के लिए DGCA का कोई औपचारिक टाइप सर्टिफिकेशन या ऑपरेशनल क्लीयरेंस नहीं मिला है। भविष्य में यात्री सेवा शुरू करने के लिए इसे निम्नलिखित नियमों का पालन करना होगा:

  • भारतीय वायुयान अधिनियम (Bharatiya Vayuyan Adhiniyam) के ढांचे का पालन करना होगा।
  • पायलटेड VTOL विमानों के लिए निर्धारित सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स को पूरा करना होगा।
ALSO READ  संविधान बचाने के लिए दिल्ली कूच करेगी अमेठी यूथ कांग्रेस, 1 नवंबर की रैली की तैयारी तेज

भारतीय विमानन नियामकों ने कुछ पायलटेड क्राफ्ट के लिए अंतरिम मार्गदर्शन जारी किया है, लेकिन eVTOL सिस्टम के लिए पूर्ण बाध्यकारी आवश्यकताएं अभी विकसित हो रही हैं। Sarla Aviation और IIT मद्रास की ePlane Company जैसे अन्य भारतीय खिलाड़ी पहले से ही इन प्रमाणन प्रक्रियाओं पर काम कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रवि तम्टा का प्रोजेक्ट प्रायोगिक चरण से आगे बढ़ता है, तो इसे भी उन्हीं कड़े सुरक्षा मानकों को पूरा करना होगा। इसमें डिजाइन ऑर्गनाइजेशन अप्रूवल और व्यापक फ्लाइट वैलिडेशन जैसी कई सालों की प्रक्रियाएं शामिल हैं। अब भविष्य की प्रगति नियंत्रित परीक्षणों, डेटा संग्रह और राज्य अधिकारियों व विमानन नियामकों के साथ चल रही बातचीत के नतीजों पर निर्भर करेगी। फिलहाल HAPIDA SKYNeX एक व्यावसायिक विमान नहीं, बल्कि पहाड़ों की चुनौतियों से जन्मा एक प्रेरणादायक व्यक्तिगत प्रोजेक्ट है।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
Account
Cart
Search
error: Content is protected !!