Skip to main content

Naradsamvad

IDBI बैंक में फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की बड़ी एंट्री, 52878 करोड़ रुपये में खरीदेगी कंट्रोलिंग स्टेक

Naradsamvad
Naradsamvad - Narad news Agency
5 Min Read

आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 14 अक्टूबर 2026 को IDBI बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी की रणनीतिक बिक्री को मंजूरी दे दी है। यह हिस्सा Fairfax Financial Holdings की एक सहायक कंपनी को बेचा जाएगा। इस पूरे लेनदेन की कीमत 52878.08 करोड़ रुपये तय की गई है।

Ad image

यह सौदा भारतीय वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश माना जा रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इस समिति की अध्यक्षता की, जिसने इस डील की पुष्टि की। इस प्रक्रिया के तहत भारत सरकार और Life Insurance Corporation of India (LIC) दोनों की हिस्सेदारी खरीदी जाएगी।

Prem Watsa के नेतृत्व वाली कंपनी 10955230 Canada Inc इस हिस्सेदारी के लिए सफल बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरी है। Press Information Bureau के आधिकारिक रिकॉर्ड (रिलीज PRID 2323320) के अनुसार, सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि Life Insurance Corporation of India 30.24 प्रतिशत हिस्सा बेचेगी।

शेयरों की कीमत और सरकार की कमाई

केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw ने जानकारी दी कि जीतने वाली बोली की कीमत 81 रुपये प्रति शेयर तय की गई है। यह कीमत 75.99 रुपये के उस बेंचमार्क से ज्यादा है, जिसे स्वतंत्र एजेंसियों ने तय किया था। यह बेंचमार्क Market Multiple Method और Asset Valuation Method के आधार पर 31 मार्च 2026 के खातों का उपयोग करके बनाया गया था।

ALSO READ  बाराबंकी: UP PET परीक्षा से पहले डीएम और एसपी ने केंद्रों पर किया औचक निरीक्षण

Bloomberg और Reuters द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, सरकार को इस बिक्री से लगभग 26000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। अब Reserve Bank of India को खरीदार का ‘फिट एंड प्रॉपर’ मूल्यांकन करना होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी नियामक नियमों का पालन हो रहा है।

DIPAM सचिव Arunish Chawla के बयानों के मुताबिक, इस डील की एक खास शर्त यह है कि Fairfax को दो साल के भीतर CSB Bank से बाहर निकलना होगा या उसे मर्ज करना होगा, क्योंकि वर्तमान में उनकी वहां 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा, इस बदलाव की प्रक्रिया के दौरान अल्पसंख्यक शेयरधारकों के लिए ओपन ऑफर की उम्मीद भी की जा सकती है।

IDBI बैंक का इतिहास और विनिवेश की जरूरत

IDBI बैंक की शुरुआत 1964 में Industrial Development Bank of India के रूप में हुई थी। बाद में यह एक कमर्शियल बैंक बना, लेकिन साल 2018 के आसपास यह बैंक गंभीर रूप से खराब कर्ज (Bad Loan) की समस्याओं से जूझने लगा था। बैंक को स्थिरता देने के लिए 2019 में Life Insurance Corporation of India इसका बहुमत मालिक बना था।

ALSO READ  दिवाली और छठ पूजा से पहले बस्ती प्रशासन अलर्ट, पटाखों की दुकानों और गोदामों की जांच

The Hindu BusinessLine की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान प्रशासन साल 2022 से ही इस विनिवेश की कोशिश कर रहा था। इसका मुख्य उद्देश्य बैंक में निजी प्रबंधन लाना और संस्थान में आधुनिक तकनीक को शामिल करना है।

मैनेजमेंट में बदलाव और भविष्य की योजनाएं

जैसे ही शेयर खरीद समझौते पर हस्ताक्षर होंगे, बैंक का मैनेजमेंट कंट्रोल Fairfax के पास चला जाएगा। अधिकारियों को उम्मीद है कि यह प्रक्रिया 2026 के अंत तक पूरी हो जाएगी। अधिग्रहण के बाद अगले तीन सालों तक बैंक अपने वर्तमान ब्रांड नाम और लोगो का उपयोग जारी रखेगा।

Moneycontrol के विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और बीमा कंपनी (LIC) बैंक बोर्ड से अपने नामित सदस्यों को हटा लेंगे और केवल सामान्य पब्लिक शेयरधारकों के रूप में काम करेंगे। विश्लेषकों का मानना है कि निजी पूंजी आने से क्रेडिट और डिपॉजिट ग्रोथ बढ़ेगी और बाजार में बैंक की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी।

ALSO READ  मिर्जापुर में जमीन विवाद को लेकर महिला के साथ मारपीट का वीडियो वायरल, पुलिस जांच शुरू

Financial Express की रिपोर्ट में कुछ बाजार जानकारों ने चेतावनी दी है कि विभिन्न बैंकिंग संस्थाओं के बीच जटिल क्रॉस-होल्डिंग्स को देखते हुए सावधानीपूर्वक निगरानी जरूरी है। वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने इस कदम को एक रणनीतिक पुनर्गठन बताया है, जिसका उद्देश्य बैंक को दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों के साथ जोड़ना है।

  • Fairfax को अब अंतिम मंजूरी के लिए Reserve Bank of India को एक औपचारिक अनुपालन रोडमैप जमा करना होगा।
  • पूरे लेनदेन को वर्तमान वित्तीय वर्ष के अंत यानी मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • भविष्य में सुधार एजेंडे के तहत सरकार और बीमा कंपनी की शेष हिस्सेदारी को धीरे-धीरे खुले बाजार के जरिए बेचा जा सकता है।

इस डील के बाद सरकार के पास 15 प्रतिशत और बीमा कंपनी के पास 19 प्रतिशत की अवशिष्ट हिस्सेदारी बनी रहेगी।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
Search
अपना ज़िला चुनें
error: Content is protected !!