टायब मेहता द्वारा साल 2002 में बनाई गई एक खास पेंटिंग ‘Rickshaw Puller’ 11 अक्टूबर 2026 को 69.1 करोड़ रुपये में बिकी है। यह पेंटिंग एक्रिलिक ऑन कैनवस माध्यम से तैयार की गई थी।
यह बिक्री Volte Una की पहली नीलामी के दौरान हुई। इस बिक्री के साथ ही टायब मेहता के लिए एक नया वर्ल्ड ऑक्शन रिकॉर्ड बन गया है। वर्तमान में यह अब तक बिकने वाली चौथी सबसे महंगी भारतीय कलाकृति बन गई है।
Architectural Digest India, The Economic Times, Financial Express, Hindustan Times और Deccan Chronicle की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अंतिम कीमत में 15 प्रतिशत का बायर प्रीमियम भी शामिल है।
नीलामी की प्रक्रिया और बोली का विवरण
इस पेंटिंग की नीलामी से पहले दुनिया के कई बड़े शहरों में इसके प्राइवेट व्यूइंग रखे गए थे। इनमें मुंबई, नई दिल्ली, न्यूयॉर्क, दुबई और लंदन जैसे शहर शामिल थे ताकि बड़े कलेक्टर इसे देख सकें।
इस कलाकृति के लिए बोली की शुरुआत 33 करोड़ रुपये से हुई थी। 12 घंटे की समय सीमा के आखिरी कुछ मिनटों में बोली लगाने वालों के बीच काफी होड़ मची और कीमत तेजी से बढ़ी।
इससे पहले टायब मेहता की किसी कृति के लिए सबसे ज्यादा कीमत 61.80 करोड़ रुपये मिली थी। वह साल 1956 की पेंटिंग ‘Trussed Bull’ थी, जिसे अप्रैल 2025 में मुंबई के Saffronart में बेचा गया था।
भारतीय आधुनिक कला बाजार की स्थिति
भारतीय आधुनिक कला की कीमतों में बहुत तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। अब इस बाजार के ऊपरी स्तर पर कीमतें 160 करोड़ रुपये के आंकड़े को भी पार कर चुकी हैं।
इस सेक्टर में कुछ प्रमुख कलाकृतियों ने अब तक के बेंचमार्क तय किए हैं, जो इस प्रकार हैं:
- राजा रवि वर्मा की ‘Yashoda and Krishna’ अप्रैल 2026 में Saffronart में लगभग 167 करोड़ रुपये में बिकी।
- एम.एफ. हुसैन की ‘Untitled (Gram Yatra)’ मार्च 2025 में न्यूयॉर्क के Christie’s में करीब 118 से 119 करोड़ रुपये तक पहुंची।
- वी.एस. गायतोंडे की ‘Untitled’ सितंबर 2025 में Saffronart में 67.08 करोड़ रुपये में बिकी।
- अमृता शेर-गिल की ‘The Story Teller’ पहले 61.8 करोड़ रुपये में बेची गई थी।
टायब मेहता साल 1947 में बने ‘Progressive Artists’ Group’ के सदस्य थे। इस ग्रुप में उनके साथ एम.एफ. हुसैन, एस.एच. रज़ा और एफ.एन. सूजा जैसे कलाकार भी शामिल थे।
कलाकार की शैली और नीलामी का नया मॉडल
टायब मेहता की पहचान उनके बोल्ड कलर फील्ड्स और कैनवस के तिरछे विभाजन (diagonal divisions) से होती है। रिक्शा चलाने वाले का यह विषय उनके कोलकाता की बचपन की यादों से जुड़ा है, जहां उन्होंने मजदूरों के रोजमर्रा के संघर्षों को देखा था।
Volte Una के फाउंडर तुषार जीवराजका ने इस बार ‘सिंगल लॉट ऑक्शन’ फॉर्मेट पेश किया। उन्होंने इसे इसलिए शुरू किया ताकि कला संग्राहकों को अधिक केंद्रित अनुभव मिल सके।
तुषार जीवराजका के अनुसार, इस नए मॉडल से पारंपरिक बायर प्रीमियम कम हो जाता है। इससे पेंटिंग बेचने वाले और खरीदने वाले दोनों को अधिक वैल्यू मिल पाती है।
बाजार के रुझान और भविष्य की योजनाएं
भारत के अमीर खरीदार अब हाई क्वालिटी मॉडर्न आर्ट को निवेश के एक गंभीर साधन के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, इस पेंटिंग को बेचने वाले और खरीदने वाले व्यक्ति की पहचान गुप्त रखी गई है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी अधिक कीमत मेहता के करियर के आखिरी समय के कामों की कमी के कारण है। ज्यादातर महत्वपूर्ण कलाकृतियां पहले से ही म्यूजियम या बड़े प्राइवेट कलेक्शन में मौजूद हैं।
कीमतें बढ़ने के कारण अब इन दुर्लभ मास्टरपीस तक संस्थागत पहुंच कठिन हो सकती है। नए संग्राहकों के लिए भी इस ऊपरी स्तर के बाजार में प्रवेश करना पूंजी की कमी के कारण चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
Volte Una ने अपनी अगली नीलामी नवंबर 2026 के अंत में तय की है। इस आने वाले इवेंट में Herwitz Collection से एम.एफ. हुसैन की एक कृति शामिल होगी।
विश्लेषकों का अनुमान है कि भारतीय कला क्षेत्र में घरेलू पूंजी के प्रवाह के कारण मॉडर्न मास्टर्स की और भी हाई प्रोफाइल बिक्री होगी। निजी संग्रहों से और अधिक काम सामने आने पर नए प्राइस रिकॉर्ड बनने की संभावना है।









