भारत ने अपनी समुद्री विरासत तक आम जनता की पहुंच का विस्तार किया है। इस पहल के कारण लाइटहाउस पर्यटन में चार गुना की भारी वृद्धि देखी गई है। साल 2024 से 2025 की अवधि के दौरान कुल 18.63 लाख पर्यटक इन स्थलों पर पहुंचे हैं।
सरकारी अधिकारियों ने 10 अक्टूबर, 2026 को एक फैक्टशीट जारी की है। इस रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि यह बढ़त 75 तटीय स्थलों को जनता के लिए खोलने के रणनीतिक प्रयास का परिणाम है।
भारत ने कई सालों तक 11,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा पर 205 लाइटहाउस बनाए रखे थे। इन सबका उपयोग केवल जहाजों के नेविगेशन यानी दिशा-निर्देशन के लिए किया जाता था।
समुद्री पर्यटन के लिए बदले नियम और प्रबंधन
लाइटहाउस की पारंपरिक दूरी और अलगाव में तब बदलाव आया जब Marine Aids to Navigation Act, 2021 लागू किया गया। इसके साथ ही Maritime India Vision को भी अमल में लाया गया।
अब Ports, Shipping and Waterways मंत्रालय के तहत आने वाला Directorate General of Lighthouses and Lightships इन स्थलों का प्रबंधन पर्यटन स्थलों के रूप में कर रहा है। मंत्रालय और Press Information Bureau के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पर्यटकों की संख्या 2014 के लगभग 4 लाख से बढ़कर 2024 से 2025 तक 18.63 लाख हो गई है।
पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विकास और प्रमुख स्थल
अधिकारियों ने इन 75 स्थानों पर मेहमानों की सुविधा के लिए कई इंतजाम किए हैं। यहां रास्तों, बगीचों, एम्फीथिएटर्स और संग्रहालयों जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।
पर्यटक अब Directorate General of Lighthouses and Lightships के आधिकारिक पोर्टल के जरिए डिजिटल टिकटिंग सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं। जनता के देखने के लिए वर्तमान में गुजरात के मांडवी और द्वारका, कर्नाटक के तद्री, तमिलनाडु के पंबन और केरल के विझिंजम जैसे प्रमुख स्थल खुले हैं।
इसके अलावा कई जगहों पर विशेष संग्रहालय भी चालू हैं, जिनमें शामिल हैं:
- चेन्नई और महाबलीपुरम
- अलाप्पुझा और कन्नूर
- मुट्टोम और द्वारका
- गोपनथ
सांस्कृतिक जुड़ाव पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल का आयोजन किया गया, जो 2023 में गोवा, 2024 में पुरी और 2026 में विशाखापत्तनम में आयोजित हुआ। इन आंकड़ों और विकास योजनाओं की पुष्टि The Hans India, Nation Press, DD India और OpenGov Asia की रिपोर्टों से भी हुई है।
सस्टेनेबिलिटी और अंतर्देशीय जलमार्गों का विस्तार
इन विरासत स्थलों के संचालन के लिए सस्टेनेबिलिटी यानी स्थिरता एक मुख्य आवश्यकता है। हर लाइटहाउस को सौर ऊर्जा द्वारा संचालित किया जा रहा है। साथ ही, 87 शोर स्टेशन Automatic Identification System तकनीक से लैस हैं, जो समुद्री जागरूकता को बढ़ाते हैं।
सरकार अब तटों से आगे बढ़कर अंतर्देशीय जलमार्गों पर बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रही है। ब्रह्मपुत्र नदी पर पाण्डु, बोगीबील, सिलघाट और बिश्वनाथ घाट पर नए निर्माण कार्य चल रहे हैं।
ये चार संरचनाएं भारत में पहली अंतर्देशीय लाइटहाउस बुनियादी ढांचा होंगी। प्रत्येक टावर 20 मीटर ऊंचा होगा और इन पर कुल लगभग 84 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
भविष्य में 25 और लाइटहाउस को पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की योजना है। समुद्री प्रशासन सुरक्षा कार्यों और सार्वजनिक पहुंच के लक्ष्यों के बीच संतुलन बना रहा है। अधिकारियों का इरादा डिजिटल टिकटिंग और लोथल में नियोजित बड़े पैमाने के संग्रहालय जैसी नई सुविधाओं के माध्यम से इन स्थलों को और अधिक एकीकृत करना है। पाठक Directorate General of Lighthouses and Lightships के आधिकारिक डिजिटल पोर्टल और Press Information Bureau की आगामी रिलीज के माध्यम से विकास की प्रगति देख सकते हैं।









